होली पर ठाना पर मौका नहीं मिल सका
शिवा चाचा रामजी के स्टेशनरी कारोबार में हाथ बंटाता और उन्हीं के पास रहता था। पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी शिवा ने सबके सामने हुई बेइज्जती का बदला लेने के लिए रामजी की हत्या करने का प्लान मार्च में ही बना लिया था। होली पर असफल रहने के बाद वह मौके की तलाश में लगा रहा। हालांकि कुछ समय बाद इरादा कमजोर पड़ गया।
घटना ने आग में घी का काम किया
लेकिन शिवराजपुर के एक गांव में रहने वाली परिवार की ही लड़की से बातचीत करने पर जब विवाद हुआ और रामजी ने सख्त लहजे में उसे युवती से बात करना बंद करने को कहा तो अपमान का घूंट पीकर रह रहे शिवा के लिए इस घटना ने आग में घी का काम किया और उसने जल्द से जल्द हत्या का मौका तलाशना शुरू कर दिया।
दोनों साथ-साथ खेलते थे सट्टा
किक्रेट व अन्य कई प्रकार की सट्टेबाजी में रामजी तिवारी और हत्यारोपी साथ-साथ दांव लगाते थे। ऑनलाइन सट्टेबाजी की वजह से ही पुलिस ने हत्या के बाद गांव व मोहल्ले के 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। यह सभी लोग लगातार मोबाइल से रामजी व शिवा के संपर्क में थे। लेकिन साक्ष्य न मिलने पर सभी को छोड़ दिया गया।
पूछताछ की तो, वह टूट गया और अपराध कबूल लिया
सिर्फ उसके हाथ में ही चोट का निशान था। जांच में उसे दो बार डांटे जाने की बात पता चली, तो पुलिस का उसपर शक गहराया और हिरासत में लेकर पूछताछ की तो वह टूट गया और अपराध कबूल लिया। अब पुलिस बरामद पत्थर में लगे खून और उसके खून का भी मिलान करेगी ताकि उसे भी साक्ष्य के तौर पर कोर्ट में पेश किया जा सके।
नाम था संस्कार, पर संस्कार से थी कोसो की दूरी
हत्यारोपी का नाम संस्कार तिवारी उर्फ शिवा था। पूछताछ में पता चला कि सगी मां की मौत के बाद जब पिता ने दूसरी शादी की और उसके प्रति व्यवहार बदला तो वह चाचा रामजी के घर ही रहने गया। चाचा ने उसे अपने बेटे की तरह अपने व्यापार में लगा लिया। एक घर में रहकर साथ ही खाना खिलाना और ख्याल रखा। लेकिन संस्कार नाम होने के बाद भी उसने हर वो काम किया जिसने उसके नाम और संस्कार में अंतर को दर्शाया। न सिर्फ वह सट्टेबाजी करता था, बल्कि परिवार की ही एक युवती से उसका संबंध भी था।