लखनऊ के राजकीय बाल गृह भेजा गया
दो महीने तक विभागाध्यक्ष डॉ. एके आर्या और उनकी टीम ने लगातार बच्ची का उपचार किया और उसकी जान बचाई। एनआईसीयू के बाहर आई बच्ची को सिस्टर रूम में नर्सों और डॉक्टरों ने माता-पिता की तरह उसे करीब दस महीने पाला और नाम पूनम रखा। शुक्रवार को लखनऊ के राजकीय बाल गृह भेज दी गई।