कानपुर। महानवमी पर शहर की अधिकांश रामलीलाओं में कुंभकरण और मेघनाद वध की लीला का मंचन किया गया। बाण लगने पर मेघनाथ मेघों की तरह गरजा और फिर कटे पेड़ सा धराशायी हो गया। सजीव मंचन देखकर दर्शक श्रीराम के जयकारे लगाने लगे। कुंभकरण वध की सूचना पर रावण के फूट-फूटकर रोने के अभिनय ने भी दर्शकों को आकर्षित किया।
परेड की रामलीला में मेघनाद वध, सुलोचना संवाद और अहिरावण वध का मंचन हुआ। शोभायात्रा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद आरती की गई और आतिशबाजी भी हुई। चंद्रिका देवी की रामलीला में मेघनाद वध और सुलोचना सती प्रसंग का मंचन किया गया। यहां मेघनाद के पुतले का दहन हुआ।
अर्मापुर इस्टेट की रामलीला में कुंभकरण, मेघनाद और अहिरावण वध की लीला दिखाई गई। शास्त्रीनगर के बड़ा सेंट्रल पार्क में लक्ष्मण को शक्ति लगने, कुंभकरण और मेघनाद वध का मंचन हुआ। छोटा सेंट्रल पार्क और जवाहर पार्क की रामलीलाओं में भी इन प्रसंगों का मंचन किया गया। वहीं जेके मंदिर की रामलीला में सीता हरण की लीला प्रस्तुत की गई।