काफी जद्दोजहद के बाद मंजूर हुआ था पुल
वर्ष 2020 में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने गदनखेड़ा बाईपास चौराहा पर पुल निर्माण को मंजूरी दी थी। हालांकि पुल नवनिर्मित उन्नाव-लालंगज (रायबरेली) हाईवे (एनएच-31) के लिए मंजूर हुआ था, लेकिन इस हाईवे पर पुल बनने से शहर के अस्पताल रोड तक करीब डेढ़ हजार मकान प्रभावित हो रहे थे। स्थानीय लोगों ने गदनखेड़ा संघर्ष समिति बनाई और एकजुट होकर पुल को लालगंज हाईवे के बजाए लखनऊ-कानपुर हाईवे (एनएच-27) पर बनाने की मांग की। काफी दिनों तक जद्दोजहद चलती रही। सांसद साक्षी महाराज ने लोगों को समस्या हल कराने का आश्वासन दिया और केंद्रीय मंत्री से मिलकर पुल को लखनऊ-कानपुर हाईवे पर बनाने की स्वीकृति दिलाई।
रोज औसतन 30,000 वाहनों का आवागमन
लखनऊ-कानपुर हाईवे के इस गदनखेड़ा चौराहे पर 24 घंटे में छोटे-बड़े औसतन 30,000 वाहनों का आवागमन होता है। उन्नाव-रायबरेली और लखनऊ-कानपुर हाईवे का मुख्य चौराहा होने से यातायात दिन-रात व्यस्त रहता है। इधर अक्तूबर 2023 से लखनऊ-कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू होने से वाहनों के हाईवे से लखनऊ जाने पर रोक है। इस डायवर्जन प्वाइंट पर कई बार घंटों जाम लगता है।
डीएम की सख्ती का दिखा असर
डीएम गौरांग राठी ने हाईवे पर जाम की समस्या को हल करने के लिए स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने गदनखेड़ा बाईपास चौराहा को 20 मीटर चौड़ा करने के साथ ही सर्विस लेन की चौड़ाई बढ़ाने के लिए कहा था। उन्होंने पीएनसी के अधिकारियों को बुलाकर पुल निर्माण कार्य में सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए काम में तेजी लाने का निर्देश दिया था। इसके बाद सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लगातार प्रगति समीक्षा की और काम में तेजी आई।