जाजमऊ में ढही बहुमंजिला इमारत का मालिक महताब आलम का वर्चस्व कोलकाता से कानपुर तक था। महताब का कच्चे चमड़े के कारोबार में जबरन एकाधिकार बना रखा था।
किसी को भी कच्चे चमड़े का कारोबार करने से पहले महताब के आगे नतमस्तक होना पड़ता था। कोलकाता से कानपुर तक कच्चे चमड़े को लाने ले जाने में बिना महताब के काम कर पाना मुश्किल था। कच्चे चमड़े का कारोबार करने वालों ने बताया कि महताब आलम का जाजमऊ में शालू फ्रेट कैरियर के नाम से ट्रांसपोर्ट है।
इसमें करीब 100 दस टायरा ट्रक हैं। यहां कानपुर से पश्चिम बंगाल तक कच्चे चमड़े का कारोबार होता था। जो चमड़ा कारोबारी महताब के ट्रकों से माल बुक नहीं कराता था, उसका ट्रक जरूर पकड़ा जाता था। बताया जाता है कि उसकी सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टरों और अफसरों में भी अच्छी पकड़ थी।
एक व्यापारी के माल के साथ एक ही बिल्टी पर दूसरे का माल ओवरलोडिंग का काम भी यहां से होता था। इस दो नंबर के कारोबार में कभी उस पर कोई आंच नहीं आई। न ही कभी जांच हुई। महताब ने कई बड़े धर्मगुरुओं को अपना आका बना रखा था। कई बार सपा से टिकट लेने के लिए इन लोगों का इस्तेमाल भी किया।