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इंतहा हो गई... इंतजार की: कन्नौज संसदीय सीट पर सपा ने बढ़ा रखा है सियासी सस्पेंस, अब तक नहीं खोला अपना पत्ता

Tue, 16 Apr 2024 07:54 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज

सार

Lok Sabha Election: कन्नौज संसदीय सीट पर सपा ने सियासी सस्पेंस बढ़ा रखा है। नामांकन शुरू होने को है लेकिन सपा ने अब तक उम्मीदवार के नाम का एलान नहीं किया है। 
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कन्नौज संसदीय सीट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के एलान को एक महीना हो चुका है। पहले दो चरण की नामांकन की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। तीसरे चरण की सीटों के लिए नामांकन हो रहा है। कन्नौज संसदीय सीट के लिए नामांकन एक दिन बाद शुरू हो जाएगा। भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित कर रखा है। बसपा ने एक बार टिकट भी बदल दिया है। लेकिन सपा के उम्मीदवार का नाम अब तक सामने नहीं आया है। सपा की अब चुप्पी सियासी सस्पेंस बढ़ा रही है।

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प्रशासनिक और सियासी गलियारों में भी हर समय इसी की चर्चा है कि सपा से उम्मीदवार कौन होगा और नाम के एलान में देरी के पीछे वजह क्या है। सियासी जानकारों का कहना है कि इसके पीछे सपा सुप्रीमो की सधी हुई चाल है। वह प्रतिद्वंदी खेमे को इसी मुद्दे पर उलझाए रखना चाहते हैं। सपा को करीब से जानने वालों का मानना है कि यह अंदरखाने तय है कि चुनाव अखिलेश यादव ही लड़ेंगे। इसी के तहत तैयारी चल रही है। शुरुआती चरण के चुनाव की व्यस्त होने की वजह से वह अभी यहां ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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ईद बाद नवरात्र पर एलान का वादा कर गए थे अखिलेश
सपा के टिकट को लेकर बढ़ रहे सस्पेंस को खत्म करने के लिए खुद पार्टी के मुखिया ने समय पर एलान करने की बात कही थी। इसी महीने दो अप्रैल को पार्टी कार्यालय में हुए कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान उन्होंने अपनी उम्मीदवारी का खुलकर एलान तो नहीं किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि वह कन्नौज नहीं छोड़ेंगे। टिकट पर उन्होंने कहा था कि जल्द घोषणा करेंगे। अब ईद हो चुकी है। नवरात्र भी पूरे होने को हैं। 17 अप्रैल को नवरात्र खत्म होते ही 18 अप्रैल से नामांकन शुरू हो जाएगा।
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भाजपा को उलझाए रखने के लिए चली चाल
अखिलेश यादव ने भले खुल कर उम्मीदवारी का एलान नहीं किया है, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि वही यहां से चुनाव लड़ेंगे। दो अप्रैल को हुए कार्यकर्ता सम्मेलन का मकसद भी यही था। उस दौरान मंच पर कई ऐसे चेहरे भी मौजूद थे, जिनको आगे कर अखिलेश यादव को चुनाव में मदद करने का संदेश दिया गया। पार्टी अपने इस कदम से भाजपा को उलझाए रखना चाहती है। भाजपा नेता इसे लेकर सपा पर हमलावर हैं। सदर सीट से विधायक और प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण पहले ही अखिलेश को यहां से लड़ने की चुनौती दे चुके हैं।
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