कानपुर। खर्राटे लेना नींद की सामान्य अवस्था नहीं बल्कि एक गंभीर बीमारी है। यह हार्ट अटैक, नींद के दौरान हांफना, सोने में कठिनाई (अनिद्रा), सुबह अत्यधिक सिरदर्द बना रहना, दिन में बहुत नींद आना (हाइपरसोमनिया), सुबह उठने के साथ अक्सर मुंह का सूखा रहना, चिड़चिड़ापन और याददाश्त में कमी जैसी विभिन्न समस्याओं की उत्पत्ति का कारण है। यह बातें सोमवार को नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) महिला फोरम के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में ईएनटी स्पेशलिस्ट डाॅ. मधुकर वशिष्ठ ने कहीं।
सीएसजेएमयू के हेल्थ साइंसेज विभाग में हुए कार्यक्रम में डॉ. वशिष्ठ ने स्लीप एपनिया एवं ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया विषय पर लोगों को जागरूक किया। नीमा महिला फोरम की महासचिव वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डाॅ. वंदना पाठक ने कहा कि स्लीप एपनिया के उपचार में आयुर्वेद बहुत कारगर है। योग व आयुर्वेद के माध्यम से इसे रोका जा सकता है। इस समस्या से पीड़ित लोगों के लिए विश्वविद्यालय में निशुल्क शिविर आयोजित किया जा रहा है जिसमें लगभग 90 मरीजों ने पंजीकरण कराया है। कार्यक्रम का उद्घाटन विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया। वहीं, नीमा महिला फोरम की अध्यक्ष डाॅ. नीरजा दुबे, कोषाध्यक्ष डाॅ. प्रतिमा गुप्ता, डाॅ. निरंकार गोयल, विभाग के निदेशक डॉ. मुनीश रस्तोगी ने भी विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन विभाग की सहायक निदेशिका डाॅ. हिना ने किया। मौके पर सहायक निदेशक डाॅ. धीरज कुमार, डाॅ. अनामिका दीक्षित, अमिना जैदी, डॉ. अल्का कटियार, डाॅ. उमेश कुमार मौर्या मौजूद रहे।