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‘ये कौन सी हवा है...’, आंखों में जलन, विजिबिलटी कम, छाया धुआं-धुंआं

Mon, 07 Nov 2016 12:15 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर में इस कदर छाया धुआं की सामने वाले को देख पाना हुआ मुश्किल - फोटो : अमर उजाला
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दिल्लीवालों को परेशान करने वाला धुआं अब कानपुर की आबोहवा को भी खराब करने लगा है। वातावरण में छाए धुएं, धुंध और बर्फीली हवाओं ने रविवार को सिहरन बढ़ा दी। अधिकतम, न्यूनतम पारा सामान्य से नीचे आ गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि धुआं और धुंध का असर सोमवार को और देखने को मिलेगा। कोहरा भी पड़ सकता है। ऐसा हुआ तो पारा नीचे आएगा और सर्दी बढ़ेगी। 
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उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों से होकर आने वाली उत्तर-पश्चिम की हवाएं मैदानी क्षेत्रों में सर्दी बढ़ा रही हैं। इसी वजह से वातावरण में सुबह की नमी 84 फीसदी और दोपहर की नमी 38 फीसदी रिकार्ड की गई। नमी से ही सर्दी बढ़ती है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि रविवार को अधिकतम पारा 30.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। यह पारा सामान्य (31.8 डिग्री सेल्सियस) से 1.4 डिग्री सेल्सियस कम है। न्यूनतम पारा 14.2 डिग्री सेल्सियस है। यह पारा शनिवार के मुकाबले .4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। अब पारा और नीचे आएगा। इसका असर विजिबिलिटी (दृश्यता) पर भी पड़ेगा।  

हरियाणा में जलाए जा रहे फसलों के अवशेष से हवा जहरीली

सांस लेने में लोगों को हो रही परेशानी
हरियाणा, दिल्ली और आस-पास वातावरण में छाया कार्बन और अन्य प्रदूषित तत्व अब कानपुर नगर और कानपुर देहात सहित सेंट्रल यूपी के अन्य जिलों तक पहुंच गया। इससे शहर में रविवार दोपहर तक धुंआ, धुंध छाई रही। विजिबिलिटी (दृश्यता) कम हो गई है। दोपहर तक 50-70 मीटर सामने तक ही दिखाई पड़ रहा था। 
उत्तर-पश्चिम की हवाएं चल रही हैं। यह हवाएं उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों और नई दिल्ली से होकर आती हैं। दिल्ली और आस-पास के क्षेत्र हरियाणा में जलाए जा रहे फसलों के अवशेष (पराली) के प्रदूषण से त्रस्त हैं। फसलों के अवशेष जलाए जाने से गाढ़ा धुआं और कार्बन वातावरण में ऊपर तक छा गए हैं। हवा के साथ धुआं और कार्बन दिल्ली की ओर से सेंट्रल यूपी में भी आ गया है। इसी वजह से शहर में दोपहर तक धुंध छाई रही। इससे आंखों में जलन होती रही। सामान्य कोहरे में ऐसा नहीं होता।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि धान की फसल काटने को मजदूर नहीं है। अब मशीनों से फसल काटी जा रही है। साथ ही पुआल और फसलों के बचे हिस्से खेत में ही फूंके जा रहे हैं। इससे वातावरण में कार्बन मोनो आक्साइड बढ़ी है। नई दिल्ली के प्रदूषण का असर सेंट्रल यूपी में दिख रहा है। वातावरण में धुंध छाने से नमी भी बढ़ गई है। इससे अधिकतम, न्यूनतम पारा सामान्य से नीचे आ गया है। बदले मौसम का असर सोमवार को और देखने को मिलेगा। कोहरा पड़ सकता है और सर्दी बढ़ेगी। रविवार को वातावरण में सुबह की नमी 84 फीसदी और दोपहर की नमी 38 फीसदी रिकार्ड की गई। नमी से ही सर्दी बढ़ती है। 
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जानलेवा हो सकते हैं ये हानिकारक तत्व

फसलों के अवशेष हवा में मिलकर जहर बन रहे
धुंध और धुएं की वजह से मार्निंग वॉक करने वालों को भी दिक्कतें आईं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आफिस की जांच में धुएं में हानिकारक तत्व सामान्य से कई गुना अधिक पाए गए हैं। इससे आंखों में जलन बढ़ी। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डा. मोहम्मद सिकंदर ने बताया कि हरियाणा, पंजाब, दिल्ली की तरफ से धुआं आ रहा है। तापमान कम होने से इसका असर दिखने लगा है। 
सुबह 5.35 बजे हवा में ये हानिकारक तत्व मानक से इतने अधिक मिले
नाइट्रिक आक्साइड---20 ग्राम , 
नाइट्रोजन डाई आक्साइड---6 ग्राम, 
नाइट्रोजन आक्साइड--10 ग्राम, 
कार्बन मोनो आक्साइड--1ग्राम, 
ओजोन--166 ग्राम, 
सल्फर डाई आक्साइड--77 ग्राम, 
पीएम 2.5---225 ग्राम, 
बेंजीन--0.16 ग्राम
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