हम जैसे नागरिक बनेंगे वैसा ही हमें शासक और प्रशासक मिलेगा। यही वजह है कि दूसरे प्रदेशों में जी-जान लगाकर काम करने वाले आईएएस और आईपीएस अधिकारी यूपी में आकर काम नहीं करते।
वे सड़कों पर ही नहीं निकलते तो पब्लिक की तकलीफों से वास्ता कैसे रखेंगे। विजय नगर चौराहे पर जाम में जूझकर ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करवा रहे शहर के जाने-माने शू एक्सपोर्टर संजय सूरी ने यह कटाक्ष किया है।
रविवार शाम विजय नगर चौराहा रोज की तरह जाम से कराह रहा था। पहले निकलने की होड़ में मारपीट की नौबत आ गई थी। पुलिस गायब थी। हर कोई व्यवस्था को कोस रहा था। तभी तिलक नगर निवासी शू एक्सपोर्टर संजय सूरी अपनी ऑडी कार किनारे खड़ी कर ट्रैफिक दुरुस्त करवाने में जुट गए।
वे किसी काम से दादानगर जा रहे थे। जाम देखा तो खुद ही मोर्चा संभाल लिया। वे ट्रक, टेंपो, रिक्शा, ठेला वालों से हाथ जोड़ते रहे, हाथ देकर रोकते भी रहे। दौड़-दौड़ कर वाहनों को रोकने के लिए दोनों हाथ ऊपर करके खड़े होते रहे, चिल्लाते रहे कि गाड़ियां आगे मत बढ़ाइए। लोगों ने उन्हें ऐसा करते देखा तो वाहन रोक भी दिए।
यह सिलसिला एक घंटे तक चला। इस दौरान उन्होंने जाम में फंसे सैकड़ों वाहनों को चौराहा पार करवाया। करीब एक घंटे बाद पुलिस की गाड़ी आई और किनारे खड़ी हो गई। वे पुलिस के पास गए और जाम की बात कही। जो जवाब मिला सुनकर दंग रह गए। गाड़ी में बैठे दरोगा ने कहा, ये कनपुरिया हैं, निकलने की व्यवस्था खुद कर लेंगे। आप परेशान मत हो। इसी तरह 4 दिसंबर को एनआरआई राजकुमार ने यशोदानगर में लगा भीषण जाम खुलवाया था।