छोटे कारोबारी भी अब इनकम टैक्स विभाग के रडार पर आ गए हैं। उनके द्वारा माल की बिक्री या सर्विस टैक्स के बदले यदि दो लाख रुपये से अधिक का नगद भुगतान किया गया है तो उन्हें इसका विवरण इनकम टैक्स विभाग को सालाना रिटर्न में देना होगा।
इस संबंध में 30 दिसंबर को उप सचिव, वित्तमंत्रालय एकता जैन ने सर्कुलर जारी किया था। नई व्यवस्था एक अप्रैल 2016 से प्रभावी होगी। मौजूदा समय में एक करोड़ सालाना टर्न ओवर पर अनिवार्य रूप से टैक्स आडिट किए जाने के प्रावधान हैं। इसके तहत बहीखाते या अभिलेखों का विभाग में टैक्स आडिट किया जाता है।
अब आडिट अभिलेखों के साथ दो लाख रुपये से अधिक के उन लेन-देन का हिसाब भी देना होगा जो नगद हुए हैं। आडिट कराने वाली फर्म को इन लेन-देन की जानकारी देनी होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता आयकर संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि आयकर विभाग की मंशा है कि नगद लेन-देन में पारदर्शिता आए।
काले धन पर भी अंकुश लगे। इस संबंध में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री ज्ञानेश मिश्र का कहना है कि छोटा व्यापारी आयकर भी भरता है लेकिन जिस तरह से हर दिन नए-नए सर्कुलर जारी हो रहे हैं। उससे छोटा व्यापारी प्रभावित होगा।
सहूलियत के लिए ये करें
नगद भुगतान, बहीखाते, अभिलेखों का पूरा वार्षिक रिकार्ड रखे
वित्तीय वर्ष खत्म होने के दो माह में वार्षिक विवरण आयकर विभाग में जमा कर दें
वार्षिक विवरण में नगद भुगतान किसको, कब किया, इसकी जानकारी जरूर दें