भारतीय थल सेना के बाद नौ सेना ने भी कानपुर की लघु शस्त्र निर्माणी (एसएएफ) में बनने वाली मशीन गन का बड़ा ऑर्डर दिया है। इस गन को समंदर का सिकंदर कहे जाने वाले आईएनएस विक्रमादित्य युद्धपोत पर भी तैनात किया जाएगा।
हाल में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने नौ सेना के अफसरों की मौजूदगी में युद्धपोत से इसी मशीन गन से कई राउंड फायरिंग की थी। अब नौ सेना की ओर से बड़ा ऑर्डर मिलने के बाद निर्माणी के अफसरों और कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
रिवाल्वर से लेकर कारबाइन बनाने वाली एसएएफ की मैगगन (मशीन गन) विश्वस्तरीय हथियार है। भारतीय थल सेना इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती है। सितंबर के दूसरे सप्ताह में सेना की ओर से निर्माणी को तीन हजार से ज्यादा मशीनगनों का ऑर्डर दिया गया था। निर्माणी के सूत्रों ने बताया कि अब नौ सेना की ओर से सैकड़ों (सुरक्षा कारणों से संख्या का खुलासा नहीं किया जा रहा है) मैगगन का ऑर्डर मिला है।
निर्माणी के महाप्रबंधक संजय पटनायक का कहना है कि नौ सेना के पास कई मशीनगन हैं, इसके बाद भी एसएएफ की मशीनगन पर भरोसा जताना गर्व की बात है। ऑर्डर मिल गया है, जल्द ही इसे पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मैगगन के निर्यात पर भी दो देशों से बातचीत चल रही है। संभावना है कि जल्द ही इन देशों से भी ऑर्डर मिल जाए।
मशीन गन (एमएजी) की खासियत
कैलिबर: 7.62 गुणा 51 एमएम
लेंथ: 1255 एमएम
वजन : 11 किलोग्राम बिना मैग्जीन के
रेंज :1800 मीटर करीब 2 किलोमीटर
रेट- ऑफ फायर 650-1000 राउंड प्रति मिनट