स्वच्छता व्यवस्था तेजी से सुधार वाले गैर उपशहरी क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों की सूची में औरैया जिले का रेलवे स्टेशन फफूंद देश में चौथे स्थान पर है, जबकि आल इंडिया में स्वच्छता व्यवस्था मामले में फफूंद रेलवे स्टेशन की 463वीं रैंक है। रेल मंत्रालय ने बुधवार को पूरे देश में साफ रेलवे स्टेशनों की सूची जारी की। इस साल ‘स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत’ स्वच्छता सर्वेक्षण में 611 रेलवे स्टेशनों में 267वें स्थान पर आए कानपुर सेंट्रल स्टेशन की दुर्दशा के पीछे केवल गंदगी ही नहीं और भी कई विफलताएं जिम्मेदार हैं।
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इस सूची में जयपुर रेलवे स्टेशन ने पहला स्थान पाया है। उपशहरी क्षेत्र में अंधेरी रेलवे स्टेशन को पहला स्थान मिला है। गैर उपशहरी कैटेगरी में सफाई व्यवस्था के मामले में सबसे तेजी के साथ सुधार वाले रेलवे स्टेशनों की सूची में फैजाबाद को पहला, अयोध्या को दूसरा, न्यू फरक्का को तीसरा एवं औरैया के फफूंद रेलवे स्टेशन को चौैथा स्थान मिला है।
कानपुर सेंट्रल स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2018 में हुए सर्वे में फफूंद रेलवे स्टेशन को मात्र 372.89 स्कोर था, जबकि सफाई व्यवस्था के मामले में तेजी से सुधार करते हुए फफूंद रेलवे स्टेशन का वर्ष 2019 में 651.84 स्कोर है। डायरेक्ट आब्जर्वेशन में कुल 223.84 स्कोर, सिटीजन फीडबैक में 223.54 स्कोर एवं प्रोसेस इवेल्यूशन में 204.46 स्कोर है।
इस तरह से वर्ष 2018 की अपेक्षा वर्ष 2019 में 278.95 स्कोर सुधरा है। सफाई व्यवस्था में तेजी के साथ सुधार वाले रेलवे स्टेशनों की सूची में चौथे स्थान पर आने पर लोगों ने खुशी जताई है। फफूंद रेलवे स्टेशन को सफाई व्यवस्था के मामले में नई रैंक मिलने की स्टेशन अधीक्षक अर्जुन सिंह ने भी पुष्टि की है।
कानपुर सेंट्रल
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि पिछले वर्ष सफाई कर्मियों की कमी के कारण फफूंद रेलवे स्टेशन की सफाई व्यवस्था चौपट थी। परंतु पिछले महीनों में यहां आटोमैटिक मशीनों से सफाई व्यवस्था हो रही है। इससे यहां की रैंकिंग में सुधार हुआ है। 14 अगस्त से आटोमैटिक मशीनों से फफूंद रेलवे स्टेशन की सफाई शुरू हो चुकी है।
इस साल ‘स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत’ स्वच्छता सर्वेक्षण में 611 रेलवे स्टेशनों में 267वें स्थान पर आए कानपुर सेंट्रल स्टेशन की दुर्दशा के पीछे केवल गंदगी ही नहीं और भी कई विफलताएं जिम्मेदार हैं। जैसे स्टेशन पर अवैध वेंडरों का घूमना, इधर-उधर गंदगी फैलाना, खाने का सामान लापरवाही से परोसना आदि चीजों को सर्वे टीम ने शामिल किया था।
नंबर एक पर आए जयपुर स्टेशन में वेंडर हाथों में ग्लब्स पहनकर खाना परोसते हैं। पिछले साल हुए सर्वे में कानपुर 61वें स्थान पर था और 2017 में 53वें पायदान पर था। एक साल में 206 पायदान नीचे आने से कानपुर स्टेशन की साख को झटका लगा है। बता दें वर्तमान में रेलवे ने कानपुर सेंट्रल की सफाई व्यवस्था का जिम्मा वाणिज्य विभाग से हटाकर मेकैनिकल विभाग के ईएनएचएम (एनवॉयरमेंट एंड हाउसकीपिंग मैनेजमेंट) को दे रखा है।
इस विभाग ने सफाई का काम निजी कंपनी को दिया है। जयपुर देश का सबसे साफ स्टेशन है और जोधपुर दूसरे नंबर पर है। टॉप-10 में सात स्टेशन राजस्थान के हैं। इसके पीछे वहां कई ऐसी व्यवस्थाएं हैं, जो कानपुर सेंट्रल पर नहीं हैं। यहां अवैध वेंडरों का दादागिरी चलती है। अवैध वेंडर खानपान की ठेलियों पर खड़ेे होते हैं और साफ सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं देते हैं।
जीएम, डीआरएम के निरीक्षण के दौरान अवैध वेंडरों और उनकी टीम को हटा दिया जाता है। इनको आरपीएफ का संरक्षण प्राप्त है। सर्वेक्षण टीम बिना बताए आई और सारी अव्यवस्थाएं दर्ज कीं। इसके अलावा गाय, कुत्तों, बंदरों का स्टेशन पर घूमना भी टीम को अखरा। स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम ने सेंट्रल पर दूषित खान-पान, अवैध वेंडरों का आतंक, अवैध रूप से चलाए जा रहे खान पान के स्टॉल, प्लेटफार्म की उखड़ी फर्श, टीन शेड से टपकता पानी, साफ पीने के पानी अव्यवस्था, बेतरतीब तरीके से पार्सल का बिखरा सामान और चोर रास्तों से पार्सल के सामान का आना-जाना भी देखा।