कानपुर। जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे के खिलाफ सात शिकायतों की जांच सुस्त हो गई है। करीब चार माह पहले जब एसआईटी के पास शिकायतें आईं थी, तब लग रहा था कि आनन-फानन जांच कर रिपोर्ट दर्ज हो जाएगी। हालांकि इसके बाद एसआईटी की जांच कछुआ चाल से भी धीमी होती चली गई। यही वजह है कि एसआईटी के पास पिछले करीब चार माह से शिकायतों की जांच लंबित हैं। एसआईटी का आकार चार से बढ़कर आठ सदस्यीय होने के बाद विवेचना की गति पर कोई असर नहीं पड़ा।
छह अगस्त 2025 को भाजपा नेता रवि सतीजा ने बर्रा थाने में अखिलेश दुबे, लवी मिश्रा व अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। इसके बाद अखिलेश और उसके साथियों पर किदवईनगर व कोतवाली में दो-दो रिपोर्ट दर्ज हुईं जबकि जूही क्षेत्र के 15 साल पुराने मामले में फिर से जांच शुरू हो गई। यह कार्रवाई एसआईटी की जांच के बाद हुई थी।
तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने सितंबर में ऑपरेशन महाकाल शुरू किया जिसमें अखिलेश के अलावा कई जमीन पर कब्जा करने और अन्य अपराधियों के खिलाफ शिकायतें आईं। सीपी कार्यालय से एसआईटी को बारी-बारी से जांच दी गईं। 10 अगस्त के बाद अखिलेश दुबे और उसके साथियों के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं ने अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा बनाया और पुलिस अधिकारियों से जांच में सहयोग करने की मांग की। नवंबर में अखिल कुमार का तबादला हो गया और रघुबीर लाल नए कमिश्नर बने। अखिल के तबादले से एसआईटी जांच को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं थीं। हालांकि, सीपी रघुबीर लाल ने कार्यभार संभालते ही एसआईटी के अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। 26 नवंबर को एसआईटी ने जांच के बाद सबूतों के अभाव में 43 शिकायतों में से 36 में अखिलेश और उसके करीबियों को क्लीनचिट दे दी थी जबकि वक्फ से संबंधित चार मामलों की जांच जिला प्रशासन कर रहा है।
करीब 10 के आसपास मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। सात शिकायतों की जांच चल रही है। वर्तमान में अखिलेश दुबे से जुड़े जिन सात मामलों की जांच एसआईटी के पास लंबित है, उनमें श्यामनगर के पूर्व पार्षद की ओर से फर्जी मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने, निरालानगर में भूपेश अवस्थी के खिलाफ सरकारी जमीन को प्लॉट बताकर बेचने, केडीए वीसी के तत्कालीन पीए व अखिलेश दुबे के बीच सांठगांठ और गोविंदनगर में अखिलेश द्वारा दुकान कब्जाने की शिकायतें शामिल हैं।
इसके अलावा रजयकांत बाजपेई के साथ अखिलेश दुबे के साजिश रचने का आरोप और गोविंदनगर के कारोबारी की ओर से 2015 में धमकाने और बेइज्जत करने की शिकायतों की जांच लंबित हैं। वहीं, गोविंदनगर के तत्कालीन इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय के खिलाफ युवती के कोर्ट में दिए गए बयान के विपरीत चार्जशीट दाखिल करने का आरोप है। इस मामले में अखिलेश के दबाव में आकर कार्रवाई करने का आरोप भी लगा है।
वर्जन:::::
एसआईटी में जिन मामलों की जांच लंबित हैं। उनमें डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी सबूत एकत्रित करने के निर्देश दिए हैं। जल्द ही जांच पूरी हो जाएगी। रघुबीर लाल,पुलिस कमिश्नर