एक साथ जारी होने की बात कही जा रही है
मंगलवार को लखनऊ में कानपुर-बुंदेलखंड की सभी 17 जिला इकाइयों पर मंथन हुआ। बैठक में जिस तरह से सभी जिलों के लिए चर्चा हुई, उससे माना जा रहा है कि ज्यादातर जिलों के अध्यक्षों का चुनाव हो जाएगा। एक दिन पहले तक चर्चा थी कि कानपुर उत्तर जिले में अधिक खींचतान होने की वजह से उसे आगे के लिए टाला जा सकता है, लेकिन अब उत्तर, दक्षिण, ग्रामीण और देहात सभी एक साथ जारी होने की बात कही जा रही है।
दो इकाइयों में हो सकता है बदलाव
बताया जा रहा है कि उत्तर जिले में जिन तीन-तीन नामों को जनप्रतिनिधियों की ओर से दिया गया था, उसमें अधिकांश में तारतम्य नहीं था। इससे देरी हो रही थी। वहीं, 2027 के चुनाव को लेकर देहात-महानगर की दो इकाइयों में बदलाव हो सकता है। बताया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं से कम जुड़ाव होने के चलते इनमें बदलाव हो सकता है।
पहली सूची में ही घोषित कर दिए जाएंगे नाम
बैठक में कानपुर के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल, क्षेत्रीय प्रभारी अनूप गुप्ता की मौजूदगी भी रही। पता चला है कि कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की सभी 17 जिला इकाइयों में से 80 प्रतिशत से अधिक जिलाध्यक्षों के नाम पहली सूची में ही घोषित कर दिए जाएंगे।
पांच की जगह अब तीन-तीन नाम के बने पैनल
भाजपा जिलाध्यक्षों के लिए पहले बनाए गए पांच-पांच नाम के पैनल को छोटा करते हुए अब तीन-तीन नाम की नई सूची बनाई गई है। इन्हीं में से किसी एक पर संघ और पार्टी हाईकमान कमान की मुहर लगेगी। बताया जा रहा कि तीन नामों के इस पैनल में वर्तमान जिलाध्यक्षों के अलावा दो अन्य दावेदारों को रखा गया है।
दावेदारों की भूमिका को भी मानक बनाया गया
अध्यक्ष पद पर कौन चुना जाएगा, इसके लिए दावेदार की उम्र के साथ उनकी कार्यप्रणाली और पार्टी के अंदर उनकी छवि को भी प्राथमिकता दी गई है। इतना ही नहीं पिछले कुछ वर्षों में पार्टी की ओर से जो भी अभियान चलाए गए उसमें दावेदारों की भूमिका कैसी रही है, इसे भी मानक बनाया गया है।
50 प्रतिशत ओबीसी व अनुसूचित जाति को मिलेगी जगह
वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिला इकाइयों का गठन करने में पिछड़ों और अनुसूचित जातियों पर भी पार्टी विशेष फोकस कर रही है। तय किया गया है कि पिछड़ों और अनुसूचित बिरादरी के जिलाध्यक्ष की संख्या कुल जिला इकाइयों का कम से कम 50 प्रतिशत रहेगी।
कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती है भाजपा
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के 17 जिलों की बात की जाए तो यहां पर आठ या नौ जिलों में इन्हीं दोनों बिरादरी के पार्टी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। पार्टी इस पर इस वजह से भी विशेष फोकस कर रही है, क्योंकि विपक्षी दल संविधान बचाओ को लेकर लोकसभा चुनाव से ही काफी सक्रिय हैं। ऐसे में भाजपा कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती है।