पीएम मोदी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मायावती
लोकसभा चुनाव 2019 में 65 हजार से ज्यादा बुंदेलियों के गले कोई राजनीतिक दल या प्रत्याशी न उतरना सभी राजनीतिक दलों के लिए खतरे का संकेत है। शायद राजनीतिक पार्टियां बुंदेलियों को धोखा दे रही हैं। तभी वह नोटा इस्तेमाल कर रहे हैं।
बुंदेलखंड के नाम पर हमदर्दी जताने और वोट हथियाने का रिवाज अब बुंदेलियों पर बेअसर हो रहा है। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा नोटा का उपयोग बुंदेलखंड में होना यहां के राजनेताओं के लिए सबक और संदेश दोनो है। सूखा, किसान आत्महत्या, पलायन, अन्ना प्रथा, अंधाधुंध नदी और पहाड़ों पर खनन इत्यादि समस्याओं से तंग आ चुके बुंदेलखंड के मतदाताओं का मोह धीरे-धीरे सभी राजनैतिक दलों और नेताओं से भंग हो रहा है।