फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साइड स्टोरी : सुमित ने 10 साल पहले जरायम की दुनिया में रखा था कदम

विज्ञापन
विज्ञापन
इटावा। जरायम की दुनिया में तेजी से पैर पसारने वाले शातिर सुमित यादव उर्फ विवेक के अपराध की कुंडली बेहद खौफनाक है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुमित ने करीब 10 साल पहले अपराध के दलदल में पहला कदम रखा था। धीरे-धीरे वह पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया। इसके बाद उसने कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया, जिसके बाद पुलिस लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।
विज्ञापन

सुमित यादव मूल रूप से निवासी नगला हरनाथ थाना सैफई का हिस्ट्रीशीटर था। उसके खिलाफ अकेले इटावा में ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ, फिरोजाबाद और मैनपुरी समेत कई अन्य जिलों के विभिन्न थानों में 26 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस के रिकार्ड के अनुसार, उस पर इटावा में ही 18, मैनपुरी में दो, लखनऊ में पांच व फिरोजाबाद में लूट, हत्या के प्रयास, चोरी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट (शस्त्र अधिनियम) जैसी गंभीर और संगीन धाराओं के तहत कुल 26 मामले दर्ज थे। अंतरजनपदीय थानों की पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी। वहीं, इस नेटवर्क से जुड़े उसके साथी अंकित उर्फ सीपू का भी आपराधिक इतिहास कम नहीं है। अंकित के खिलाफ थाना बसरेहर और थाना इकदिल में लूट, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत चार मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुमित ने साल 2016 में थाना इकदिल क्षेत्र में लूट की पहली वारदात को अंजाम दिया था, जिसके बाद से वह लगातार वारदातों को अंजाम देकर पुलिस को चुनौती दे रहा था।
सुमित के पिता खेती किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सुमित युवा उम्र में ही गलत संगत में पड़ गया। महंगे शौक ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया। साल 2016 में अपराध में कदम रखने के बाद सुमित ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने इसी साल एक के बाद 16 अपराध किए। इससे वह पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया। पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीसीट खोल दी।
विज्ञापन


इटावा। दुरुस्त कानून व्यवस्था के दावे के बीच तीन जुलाई की सुबह शहर के प्रतिष्ठित डॉक्टर की चेन लूटकर अंकित और शिवम ने पुलिस को चुनौती दे डाली थी। सुबह-सुबह बीच शहर में डॉक्टर के साथ हुई लूट ने पुलिस महकमे को परेशान कर दिया था।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी बृजेश श्रीवास्तव ने एसओजी, थाना पुलिस और सर्विलांस की टीमों को लगाया था। सात दिन की मेहनत के बाद पुलिस ने शिवम को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी अंकित पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। सर्विलांस और एसओजी टीम को लगातार उसके जिले से बाहर होने की सूचनाएं मिल रही थीं। उसके आसपास का नेटवर्क भी खंगाला जा रहा था, तब पुलिस के संज्ञान में सुमित का नाम आया था। सुमित और अंकित की दाेस्ती की बात सामने आने के बाद पुलिस ने सुमित की भी निगरानी शुरू कर दी थी। एसओजी लगातार आसपास के जिलों में भी दबिश दे रही थी, लेकिन अंकित का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी संभावित ठिकानों से फरार हो जाते थे। ऐसे में शुक्रवार को एसओजी को पक्की सूचना मिली कि आरोपी प्रदेश छोड़ने की फिराक में है। इसलिए ही उसकी घेराबंदी शिकोहाबाद में की गई थी, पर एसओजी टीम को आरोपियों के हथियारों से लैस होने व अचानक इस तरह हमला करने का अंदेशा नहीं था, ऐसे में वह पूरी तरह तैयार नहीं थे। हमले के समय टीम की बुलेट प्रूफ जैकेट भी उनकी कार में पड़ी हुई थी।
शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन पर संबलपुर एक्सप्रेस 10:50 पर पहुंचती है। इसके यहां से छूटने का समय दो मिनट बाद 10:52 होता है। ट्रेन शुक्रवार को अपने निर्धारित समय से लगभग तीन मिनट देर से 10:33 बजे स्टेशन पहुंची थी। इस बीच आपाधापी का माहौल हो जाने के बाद लगभग लगभग 18 मिनट तक ट्रेन स्टेशन पर ही खड़ी रही। ट्रेन 11:11 मिनट पर रवाना हुई। इस घटना की वजह से ट्रेन देरी से रवाना होने की चर्चा है। हालांकि रेलवे विभाग का कहना है कि अन्य तकनीकी कारणों से रुकी थी।
घटना के बाद भरथना में रहने वाले अंकित के भाई दीपू ने कहा कि उसका भाई किसी की सुनता नहीं था। इसी का परिणाम यह घटना हुई है। शुक्रवार रात को परिजन अंकित का शव लेने के लिए इटावा से फिरोजाबाद के लिए रवाना हो गए थे।

इटावा। लगभग 13 दिन से लूट के आरोपी को पकड़ने का प्रयास कर रही एसओजी शुक्रवार सुबह अंकित और उसके मित्र सुमित का घेराव करने पहुंची तो आरोपी उन्हें देखकर प्लेटफार्म की दूसरी तरफ कूदकर भागने लगे। उन्हें भागता देखकर सबसे आगे सिपाही डेविड ने पीछा किया तो सुमित ने अपनी पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी।
गोली चलते ही स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। फायरिंग के दौरान एक गोली डेविड के पेट में लग गई, लेकिन फिर भी डेविड ने कुछ कदम तक पीछा करके पकड़ने का प्रयास किया। आगे जाकर वह बेसुध होकर बैठ गया और जवाबी कार्रवाई में दो फायर भी किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। घायल साथी को देखकर अन्य एसओजी के सिपाही रुकने लगे तो डेविड ने उन्हें आगे जाकर पकड़ने के लिए कहा। आगे बढ़ते ही आरोपियों ने फिर फायर किया, एक गोली सिपाही पुष्पेंद्र के कंधे में जा लगी। दो साथियों के घायल होने के बाद भी एसओजी के जवानों ने हिम्मत नहीं हारी और पीछा करते रहे। इस बीच आरोपियों ने एसओजी के जवानों को दबाव में लेने के लिए आरोपी स्टेशन के पास स्थित नेम खेरिया गांव में घुस गए। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय में सुमित ने एक बच्चे को गोद में लेकर फिल्मी स्टाइल में उसकी कनपटी पर पिस्टल लगा दी। इससे प्राथमिक विद्यालय के साथ ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। एसओजी के जवानों ने समझदारी का परिचय देते हुए यहां भी ग्रामीणों को किनारे कराकर आरोपियों का सामना किया। एसओजी के लगातार डटे रहने की वजह से दोनों आरोपी अलग-अलग दिशाओं में भागने को मजबूर हो गए।
एसओजी टीम पर हमला होते ही लखनऊ तक खलबली मच गई। इटावा से एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी सिटी अभय नाथ त्रिपाठी तीन थानों की पुलिस के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। डीजीपी ने आगरा और कानपुर के अधिकारियों को भी घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए। फिरोजाबाद और इटावा की कुल छह थानों की पुलिस ने लगभग दो घंटे तक अभियान चलाकर दोनों आरोपियों को ढेर कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें