कानपुर। डीजीपी कहें या कप्तान, थानेदार किसी की नहीं सुनते। रईसजादे की लग्जरी कार से होटल कारोबारी की मौत के मामले में पीड़ित पुलिस के चक्कर काट-काटकर थक गया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। सेटिंग-गेटिंग करके पुलिस बैठ गई तो पीड़ित परिवार ने ही पूरी जांच कर डाली। गाड़ी मालिक का नाम-पता तलाशने के साथ ही हादसे के वक्त गाड़ी में कौन था और प्रत्यक्षदर्शी का भी पता लगा लिया है। अब पीड़ित ने आरोपियों पर कार्रवाई के लिए कोर्ट का सहारा लिया है। कारोबारी का भाई अपने स्तर से जांच कर कोर्ट में हलफनामा देकर बयान दर्ज करवाएगा।
तिलक नगर रतन विला निवासी भरत लालवानी उर्फ खेमचंद्र कालू का परेड ग्राउंड के पास रामा भोजनालय है। 2 जुलाई की रात को वीआईपी रोड परमट तिराहे के पास तेज रफ्तार लग्जरी गाड़ी की टक्कर से बुलेट सवार खेमचंद की मौत हो गई थी। भरत के भाई जीतू ने चमनगंज निवासी गाड़ी मालिक जहीर बेग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने टालामटोली करने के बाद रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि विवेचक दरोगा अतुल ने मामले की जांच भी नहीं शुरू की है। दरोगा ने कहा कि पीड़ित के बयान के बाद ही जांच शुरू होगी।
जबकि एक भी आरोपी का बयान पुलिस ने नहीं दर्ज किया और पीड़ित के बयान का इंतजार कर रही है। भरत के भाई जीतू ने बताया पुलिस ने जांच में हीलाहवाली की तो उसने खुद ही रात-दिन एक करके सबकुछ पता कर लिया। जीतू की मानें तो गाड़ी लेदर कारोबारी का बेटा अरीब चला रहा था। उसके साथ में कैंट निवासी घी कारोबारी का बेटा और एक अन्य युवक था। पीड़ित के पास सभी आरोपियों के नाम-पते सहित प्रत्यक्षदर्शी तीन सिक्योरिटी गार्ड भी हैं जो घटना के वक्त वहां एक घर की सुरक्षा में तैनात थे। पीड़ित का आरोप है कि इतने साक्ष्य होने के बाद भी पुलिस कार्रवाई से बच रही है। जीतू ने अब सभी साक्ष्यों के साथ कोर्ट में कार्रवाई के लिए एक अर्जी दायर की है।
हादसा एक नजर में
a 2 जुलाई की देर रात वीआईपी रोड पर हुआ था हादसा
a 4 जुलाई को पीड़ित की तहरीर पर कार मालिक जफर अली बेग पर 304-ए की रिपोर्ट दर्ज
a 5 जुलाई को पीड़ित ने धारा-304 (2) बढ़वाने के लिए फिर से थाने और एसएसपी को दी अर्जी
दोनों धाराओं में अंतर
a धारा 304-(1) का आशय गैर इरादतन हत्या का मामला है।
a धारा-304 (2)- ऐसी लापरवाही जिससे किसी की जान खतरे में पड़ सकती है यह मालूम होते हुए भी उस कार्य को करना। यही धारा हीरो सलमान खान पर लगाई गई थी। जब उनकी कार से फुटपाथ पर कई लोग कुचल गए थे।
कानून में झोल का फायदा उठाती पुलिस
सीनियर एडवोकेट विजय बक्शी का कहना है कि धारा 304 (1) में उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण काम से मौत पर दो साल सजा का प्रावधान है। इस धारा का अपराध जमानतीय है। दरअसल यह कानून अंग्रेजों के समय का बनाया गया था। तब अंग्रेजों के पास ही गाड़ियां होती थीं। दुर्घटना में किसी की मौत पर इसी धारा में मामला दर्ज होता था। अब काफी बदलाव आया है लेकिन पुलिस कानून के इस झोल का फायदा उठाते हुए लालच में अभियुक्तों के साथ खड़ी हो जाती है। धारा 304 (2) में कहा गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा यह जानते हुए ऐसा काम करना कि इससे किसी की मौत हो सकती है। इसमें दस साल सजा है। यह गैर जमानतीय भी है। ज्यादार दुर्घटनाओं में मौत का कारण जानबूझकर वाहन तेज चलाना या शराब पीकर चलाना होता है। इसलिए पुलिस को धारा 304(2) में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करनी चाहिए।
अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित के मुताबिक किसी भी मुकदमे में विवेचक की जांच को ही कोर्ट मान्यता देती है। फिर भी वादी किसी मुकदमें में अपने पक्ष में सबूत इकट्ठा कर सकता है। नियमत: यह सबूत वादी मुकदमे के विवेचक को देगा। अब इस मामले में पुलिस पर पहले से ही अभियुक्तों का साथ देने का आरोप है। इसलिए प्रश्न यह उठता है कि विवेचक इस मुकदमे में वादी द्वारा दिए गए सबूत को अपनी विवेचना का आधार बनाता है या नहीं। वादी को सबूत देने की कोई रिसीविंग भी नहीं दी जाती है। इसलिए वादी के पास कोर्ट के माध्यम से विवेचक को सबूत देने का अधिकार बचता है। वादी सबूत कोर्ट में पेश कर विवेचक को दे सकता है। चूंकि यह सबूत कोर्ट के संज्ञान में होंगे इसलिए विवेचक इन सबूतों को नकार नहीं सकेगा।