‘बजरंगबली’ और ‘हजरत अली’ के ‘हैप्पी बर्थडे’ पर सीएम योगी आदित्यनाथ के ट्वीट ने लोगों के होश उड़ा कर रख दिए। पढ़िए क्या लिखा है योगी के इस ट्वीट में...
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हनुमान ‘महाबली’ तो अली ‘शेरे खुदा’
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योगी आदित्यनाथ ने हनुमान जयंती पर ट्विटर पर यूं दी बधाई
इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ के ट्विटर अकाउंट पर दो पिक्चर्स के साथ योगी ने अपनी बात लिखी है। इसी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। दरअसल, योगी आदित्यनाथ की छवी को लेकर हमेशा संशय कायम रहा है कि वे कट्टर हिन्दूवादी नेता रहे है जबकि उनके इस ट्वीट में तो कुछ और ही नजर आ रहा है...
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हजरत अली बहादुरी के लिए मशहूर
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हजरत अली के जन्मदिन पर मुस्लिम भाइयों को सीएम योगी ने ऐसे दी बधाई
‘बजरंगबली’ और ‘हजरत अली’ का ‘हैप्पी बर्थडे’ सीएम योगी ने एक साथ दोनों समुदाय के लोगों को बधाई दी और अपनी खुशी व्यक्त की। बस फिर क्या था योगी के इस ट्वीट पर छिड़ गई चर्चा...
#UPCM श्री योगी आदित्यनाथ ने हजरत अली के जन्म दिन पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी। pic.twitter.com/1J0VTLpwMA
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) April 11, 2017
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बांदा में ऐसे मनाई गई हनुमान जयंती
वहीं यूपी के बांदा में एक साथ ‘इमामे हिंद’ (श्री राम) और ‘सुल्ताने हिंद’ (ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती, अजमेर) के एक साथ मनाए गए जन्मदिन और उर्स के पांच दिनों बाद ही अब ‘बजरंगबली’ और ‘हजरत अली’ के एक ही दिन पड़े जन्म दिन के दुर्लभ संयोग ने हिंदू-मुस्लिमों के बीच कौमी एकता और सौहार्द का नायाब नमूना पेश कर दिया।
प्रदेश में भाजपा सरकार और चौतरफा भगवा की धूम के बीच मीट बंदी, बूचड़खाना और तीन तलाक जैसे मुद्दों ने माहौल काफी गरमा दिया है। लेकिन तीज-त्योहारों का संयोग कुछ अलग ही है। हिंदू-मुस्लिम के बीच त्योहारों के यह दुर्लभ इत्तेफाक एकता का पैगाम बिखेर रहे हैं। इसी माह अप्रैल में पांच दिन पूर्व राम जन्मोत्सव (रामनवमी) थी। मशहूर मुस्लिम शायर अल्लामा इकबाल ने श्रीराम को ‘इमामे हिंद’ के लकब (उपाधि) से नवाजा है।
रामनवमी के मौके पर ही ‘सुल्ताने हिंद’ (ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती, अजमेर) का उर्स भी था। यह उर्स भी काफी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। राम और ख्वाजा को एक साथ याद किया गया। अब मंगलवार (10 अप्रैल) को महाबली ‘बजरंगबली’ (हनुमान) और इस्लाम धर्म के खलीफा ‘हजरत अली’ के जन्म दिन एक ही दिन मनाए गए।
बजरंगबली (हनुमान) को चमत्कारिक सफलता देने वाला देवता भी कहा जाता है। उन्होंने जन्म के बाद से ही अलौकिक शक्तियां प्राप्त कर लीं। लंका में रावण के चंगुल से सीता को बचाने में श्रीराम की जोरदार मदद की। तबसे उन्हें महाबली कहा जाता है। अपनी विचित्र आकार वाली ठोड़ी (ठुड्डी) की वजह से उन्हें ‘हनुमान’ नाम दिया गया। उन्होंने हिमालय में पहाड़ों पर अपने नाखूनों से रामायण लिखी। सीता ने प्रेमवश सोने का हार तोहफे के तौर पर देना चाहा तो हनुमान ने मना कर दिया। सीता गुस्सा हुईं तो हनुमान ने अपनी छाती चीरकर राम की छवि दिखा दी। कहा कि उनके लिए इससे अनमोल कुछ नहीं है। संस्कृति में हनुमान के 108 नाम है।
हजरत अली बहादुरी के लिए मशहूर हैं। हजरत मोहम्मद के बाद खलीफा युग में वह पांच वर्षों तक खलीफा रहे। वीरान जंगलों को आबाद कर बस्तियां बसाईं और गरीबों को मुफ्त सौंप दी। खुद कुएं खोदे। खेती की और खजूर के पेड़ लगाए। अवसरवादियों और रुढ़ीवादियों का डटकर मुकाबला किया। हिजरी कलेंडर के रमजान में 31 तारीख को सुबह नमाज अदा करते वक्त 63 वर्ष की उम्र में कूफा शहर की मस्जिद में शहीद कर दिया गया। हजरत अली ने हमेशा सत्य के मार्ग पर डटे रहने का संदेश दिया। उनके जन्म दिन पर बांदा शहर की पूर्वी कोठी में ‘अली डे’ मनाया गया। इर्तिजा मेंहदी के इमामबाड़े में तिलावत और नातिया मुशायरा हुआ। इस दौरान अली इमाम आब्दी, सैय्यद अली मंजर, हसन रजा, इब्ने हसन, मीसम जैदी, आसिम जैदी समेत कई स्थानीय शायर शामिल रहे।