कानपुर से आतंक का कनेक्शन पुराना है। बड़े संगठनों के आतंकी शहर से पकड़े जा चुके हैं। कई वारदातें भी हुईं। फिर भी एटीएस यूनिट को उतनी मजबूती नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। दफ्तर भी स्थायी नहीं है। बड़े अफसर कानपुर के बजाय लखनऊ मुख्यालय में ही बैठते हैं।
जबकि कानपुर एटीएस यूनिट के पास रेंज के छह जिलों की निगरानी की जिम्मेदारी है। यहां तैनात 11 का स्टाफ ही यही जिम्मेदारी संभाल रहा है। अलकायदा के आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री ने एटीएस को और मजबूत करने को कहा है।
जिससे ऐसे आतंकवादियों पर कार्रवाई हो सके और आतंकी वारदातों पर शत प्रतिशत अंकुश लगाया जा सके। भविष्य में देखना होगा कि शासन अपने दावों पर कितना खरा उतरता है। दरअसल, एटीएस की कानपुर यूनिट में वर्तमान में 11 का स्टाफ है।
एक डीएसपी, एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर व आठ सिपाही हैं। कानपुर यूनिट के डीएसपी लखनऊ मुख्यालय में ही बैठते हैं। वहीं एक अन्य इंस्पेक्टर हरिशंकर मिश्रा के ट्रांसफर होने के बाद दूसरे की तैनाती ही नहीं की गई। रेंज के छह जिले कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, फर्रुखाबाद, इटावा और कन्नौज को यही 11 लोग देख रहे हैं।