एक तरफ केंद्र व प्रदेश सरकार शिक्षा उन्न्यन के लिए पानी की तरह पैसा खर्च कर रही है लेकिन शिक्षा माफिया अपनी जेब गरम करने के लिए सरकार के सभी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कानपुर महानगर में सामने आया है।
कानपुर जनपद के ग्राम टिघरा, पोस्ट चौबेपुर बिल्हौर में एक ही बिल्डिंग में तीन अलग-अलग नामों से कॉलेज संचालित होने की जांच शासन ने शुरू करा दी है। कोई पकड़ न सके इसके लिए दस्तावेजों पर तीनों कॉलेजों का पता अलग-अलग दिया हुआ है। यह फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब कॉलेज की ही पूर्व प्राचार्या जिज्ञासा श्रीवास्तव व प्रवक्ता शरद कुमार सिंह ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री से कर दी। शासन ने मामले की जांच क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. अनिल मिश्रा को सौंपी है।
एक ही बिल्डिंग में अभिनव इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, आस्था इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज और अभिनव कॉलेज ऑफ फार्मेसी कॉलेजों को दो अलग-अलग समितियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। पहली समिति अभिनव सेवा संस्थान और दूसरी पदम एजूकेशन फाउंडेशन है। दोनों संस्थानों के पदाधिकारी भी लगभग एक ही हैं। पदम एजुकेशन फाउंडेशन में डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, शिप्रा श्रीवास्तव, निशा श्रीवास्तव सदस्य हैं जबकि अभिनव सेवा संस्थान में भी निशा श्रीवास्तव, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव संस्थापक सदस्य हैं। इस संस्थान के अध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र नाथ श्रीवास्तव हैं। इन दोनों संस्थानों द्वारा संचालित कॉलेजों में बीएड, बीटीसी और बीफार्मा जैसे कोर्स चल रहे हैं।
मान्यता का चला खेल, बड़े-बड़े हो गए फेल
कॉलेज ने बीएड, बीटीसी और बीफार्मा जैसे बड़े कोर्स संचालित करने के लिए बड़ी ही चालाकी से मान्यता हासिल कर ली। कॉलेज की पूर्व प्राचार्या जिज्ञासा श्रीवास्तव का आरोप है कि जब भी कोई टीम कॉलेज में निरीक्षण करने आती थी तब कॉलेज का बोर्ड बदल दिया जाता था। इससे निरीक्षण करने वाले इसे पकड़ नहीं पाते।
ऐसे हुई फर्जीवाड़े की शुरुआत
सबसे पहले 2014 में 216/217 ग्राम टिघरा, पोस्ट चौबेपुर बिल्हौर में अभिनव इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज खोला गया। इस कॉलेज में बीटीसी का कोर्स शुरू हुआ और इसकी मान्यता नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) और संबद्धता एससीईआरटी सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी यूपी ने दी। आरोप है कि जिस भूमि पर यह कॉलेज संचालित हो रहा है वो अभिनव सेवा संस्थान के नाम दर्ज है जबकि इसे दस्तावेजों में अभिनव इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के नाम दिखा दिया गया।
फिर दूसरी समिति बनाकर खोल लिया कॉलेज
अभिनव इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के बाद इसी कॉलेज बिल्डिंग में एक दूसरा कॉलेज खुला जिसका नाम आस्था इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज है। यह पद्म एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा संचालित होता है और इसने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से बीएड व एनसीटीई और एससीईआरटी सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी यूपी से बीटीसी कोर्स संचालित करने की मान्यता हासिल कर ली। दस्तावेजों पर इसे 190/191 ग्राम टिघरा, पोस्ट चौबेपुर तहसील बिल्हौर में संचालित होते दिखाया गया है जबकि हकीकत है कि इस जगह कोई परिसर ही नहीं है।
तीसरा कॉलेज भी खोल लिया
दो कॉलेजों के बाद 2016 में 216/217 ग्राम टिघरा पोस्ट चौबेपुर तहसील बिल्हौर के पते पर ही अभिनव फार्मेसी कॉलेज की मान्यता यूपी होमियोपैथी मेडिसिन बोर्ड लखनऊ से ली गई। आरोप है कि बोर्ड से भी छिपाया गया है कि पहले से ही इस बिल्डिंग में एक कॉलेज संचालित हो रहा है।
एक ही बिल्डिंग में तीन अलग-अलग नामों से कॉलेज संचालित किए जाने की शिकायत मिली है। शासन ने इसकी जांच करने के आदेश दिए हैं। एक सप्ताह में मामले की जांच पूरी हो जाएगी। संबंधित पक्ष को नोटिस भेजकर उनका लिखित जवाब भी मांगा जाएगा।
डॉ. अनिल मिश्र, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी
सारे आरोप बेबुनियाद हैं। दो बिल्डिंग में ये तीन कॉलेज संचालित हो रहे हैं। आरोप लगाने वाली महिला और उसके पति को हमने कॉलेज से निकाल दिया है। दोनों फर्जी दस्तावेज तैयार करके मुझे फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।
डॉ. एसएन श्रीवास्तव, प्रबंधक
अभिनव इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज