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शारदीय नवरात्र सात अक्तूबर से, माता जगदंबे के पूजन के लिए तैयार होने लगीं प्रतिमाएं

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पुखरायां में माता जगदंबे की प्रतिमा को अंतिम रूप देते कारीगर। संवाद - फोटो : PUKHRAYAN
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पुखरायां। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के किए तैयारियां शुरू हो गई हैं। मूसानगर के खालेशहर में प्रतिमाओं को संवारा जा रहा है। पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता होने के कारण मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। वहीं कारीगर मांग के अनुसार प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।
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शारदीय नवरात्र सात अक्तूबर से शुरू हो रहे हैं। इसके लिए कस्बे में तैयारियां तेज हो गई हैं। जगह जगह पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना के लिए पूजा समितियों ने योजना बनानी शुरू कर दी हैं।
समिति के पदाधिकारियों ने कारीगरों को प्रतिमा के लिए अभी आर्डर भी दे दिया है। भोगनीपुर में मूसानगर के खालेशहर में कारीगर मिट्टी की देवी प्रतिमाएं बना रहे हैं।
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कारीगर बृजेश और विनय बताते हैं कि उनके पिता रामप्रसाद प्रतिमाएं बनाते थे। पिता से कला सीखने के बाद उन्होंने चिकनी मिट्टी से प्रतिमाएं बनाने का कार्य शुरू किया। वहीं अब पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की सोच बदली तो मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग भी बढ़ी।
उनके पास जिले के लोगों के अलावा कानपुर नगर, हमीरपुर, जालौन, औरैया से भी लोग प्रतिमाएं लेने आते हैं। इसके लिए लोग व पूजा समिति के पदाधिकारी पहले से ही आर्डर देते हैं।
बृजेश ने बताया कि गर्मी के समय जब तालाबों में पानी तलहटी में सूख जाता है तो उसमें जमने वाली मिट्टी की सतह को खोदकर भंडारण कर लिया जाता है। इसमें गोबर और भूसा मिलाते हैं।
प्रतिमा निर्माण के लिए पुआल और बांस का प्रयोग कर ढांचा तैयार किया जाता है। चेहरे के लिए सांचे का प्रयोग होता है। प्रतिमा की सजावट में कच्चे केमिकल रहित रंगों का प्रयोग किया जाता है।
इस कार्य में दोनों भाइयों की पत्नियां कांती व सुमन भी परिवार के साथ सहयोग करती हैं। छोटी प्रतिमाओं की कीमत तीन हजार और बड़ी की 14 हजार से शुरूआत होती है। अभी तक 40 प्रतिमाओं का आर्डर मिल चुका है। काफी लोग नवरात्र पूजन के दौरान तुरंत खरीदकर प्रतिमाओं को अपने साथ ले जाते हैं।
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