शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के जनपद हरदोई में गोवर्धनमठ पुरीपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि पौराणिक संस्कृति ही हमारी धरोहर है। विश्व भारत को इसी नाते से जानता है। इसे हर हाल में संरक्षित रखना होगा। भारत के आदर्श व अस्तित्व को बचाए रखना हमारा दायित्व है। हर जाति धर्म, अमीर गरीब सभी वर्ग के लोगों को अपनी सूझ बूझ से देश व विश्व के ह्दय को दिशाहीन होने से बचाना है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पेड़-पौधों को अपने पोषण के लिए खाद पानी चाहिए वैसे ही मनुष्य को भी अर्थ व तृप्ति की आवश्यकता होती है। लेकिन इसके लिए उसे गलत कामों का सहारा नहीं लेना चाहिए। कहा कि जब तक मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप का बोध नहीं होता है तब तक वह धर्म के खिलाफ कभी भी खड़ा हो जाता है। धर्म का ज्ञान होते ही वह तपोमय जीवन व्यतीत करता है।
शंकराचार्य ने कहा- भगवान राम का कोई दल नहीं है
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज
- फोटो : अमर उजाला
शंकराचार्य ने कहा कि धन लालसा में व्यक्ति सोना भूल जाता है या उसे नींद नहीं आती जिससे वह पागल तक हो जाता है। इसके बाद शक्तिपीठ श्री श्रवण देवी मंदिर परिसर में शंकराचार्य का वाहन मंदिर के बाहर तक आया और उन्होंने वहीं से हाथ जोड़कर मां का आशीर्वाद लिया। अपने उद्बोधन के दौरान सामने से आ जा रहे लोगों देखकर उन्होंने व्यंग्य कर कहा कि क्या यही रास्ता बना रखा है। उधर से जाओ भाई।
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि शासन के लिए राम नाम का प्रयोग किया जा रहा है। भगवान राम का कोई दल नहीं है। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के न चाहते हुए भी सूझबूझ के चलते सोमनाथ का मंदिर स्थापित करवा दिया तो यहां भी मंदिर बनवाया जा सकता है।
हंस कर माला पहनने से किया इंकार
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज
- फोटो : अमर उजाला
अपने उद्बोधन में हरदोई को स्थान देते हुए शंकराचार्य ने बताया कि नयी पीढ़ी को बताना चाहता हूं कि 50 साल बाद एक बार फिर हरदोई आया हूं। यह देखकर खुशी हुई कि जिले में सनातन धर्म व ईश्वर को मानने वाले लोग हैं।
हंस कर माला पहनने से किया इंकार
सादगी का परिचय देने वाले शंकराचार्य मंच पर जैसे ही आए उन्हें माला पहनाने के लिए आयोजक मंडल आगे आया लेकिन उन्होंने माला ले लिया पर मुस्कुराकर माला नहीं पहना।