घटनास्थल का निरीक्षण कर आरोपी से पूछताछ
पुलिस ने संदीप को जेल भेज दिया था। हत्यारोपी के खिलाफ साक्ष्य जुटाने के लिए स्टेट मेडिको लीगल सेल के जेडी डॉ. कीर्तिवर्धन सिंह से जांच कराई। अधिकारी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आरोपी से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि तत्कालीन थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
बिसरा की जांच रिपोर्ट में जहर से मौत न होने की पुष्टि
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट और मौत का कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा सुरक्षित कर झांसी लैब में जांच के लिए भेजा गया था। जेडी के अनुसार, जांच रिपोर्ट में किसी जहरीले पदार्थ से भी उसकी मौत न होने की पुष्टि हुई है। ऐसे में नौकर की हत्या किए जाने के पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य न होने से मिल मालिक को लाभ पहुंच सकता है।
सवालों को सुनकर हत्यारोपी का छूटा पसीना
जमानत पर बाहर आए संदीप गुप्ता से जब डायरेक्टर डॉ. कीर्तिवर्धन ने सवाल किया, तो उसके पसीना छूटने लगा। संदीप ने बताया कि घटना के दिन वह अपने एक परिचित के साथ सर्वेंट क्वार्टर के बाहर पहुंचे। देखा कमरे का गेट अंदर से बंद था। इस पर उन्होंने धक्का मारकर गेट तोड़ा।
ज्वाइंट डायरेक्टर ने फील्ड यूनिट की रिपोर्ट को नकारा
फील्ड यूनिट प्रभारी डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने अपनी रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया था। विवेचक थाना प्रभारी ने सवाल उठाया कि जिस कमरे में शव मिला था। उसमें एक खिड़की, गेट के नीचे चार इंच का गैप व पीछे की दीवार पर दो होल थे। ऐसे में दम कैसा घुट सकता है। ज्वाइंट डायरेक्टर ने कमरे की पड़ताल की और उन्होंने भी फील्ड यूनिट की जांच रिपोर्ट को सिरे से नकार दिया।
चोटों के निशान पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिक्र नहीं
विवेचक ने ज्वाइंट डायरेक्टर को बताया कि घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले पुलिस कर्मियों ने कमरे का सामान अस्त व्यस्त पड़ा होने व मृतक के शरीर पर चोटों के निशान बताए थे। वहीं एसआई जग प्रताप सिंह ने भी शरीर पर चोटों के निशान की पुष्टि की थी। इसके बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों का जिक्र नहीं किया गया।