कोरोना ठीक होने के बाद अब रोगियों को गुर्दे की समस्या हो रही है। पैथोलॉजिकल जांचों और ओपीडी के सैंपल सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है। पोस्ट कोविड रोगियों में जिनका लंबा इलाज चला है, अब उनके गुर्दे बीमार हो गए हैं। हैलट में गुर्दे के 50 फीसदी रोगी बढ़ गए हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान सीरम क्रेटेनिन बढ़ने पर ध्यान नहीं दिया गया।
इससे बहुत से रोगियों को अब डायलिसिस करानी पड़ रही है। पैथोलॉजिकल जांचों में पाया गया कि 50 फीसदी पोस्ट कोविड रोगियों की सीरम क्रेटेनिन बढ़ी हुई है। डॉक्टर इसे कोरोना संक्रमण और इलाज में दी जाने वाली दवाओं का असर मान रहे हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में इस वक्त दो तरह के पोस्ट कोविड रोगी आ रहे हैं।
एक रोगी जिन्हें एक्यूट किडनी इंजरी हो गई है। यह कोरोना के संक्रमण के कारण हुआ है। ऐसे 90 फीसदी रोगी दवा खाने से तीन-चार सप्ताह बाद बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। लेकिन जिन रोगियों के गुर्दों में इंजरी अधिक आ गई है, उन्हें डायलिसिस पर रखना पड़ रहा है। इसके अलावा दूसरी तरह के वे रोगी हैं, जो पहले से किडनी की समस्या से ग्रसित थे। इलाज से सामान्य जीवन जी रहे थे। कोरोना होने के बाद वे अब डायलिसिस पर निर्भर हो गए हैं।
- इस वक्त दो तरह के रोगियों की डायलिसिस चल रही है। एक तो एक्यूट किडनी इंजरी के हैं और दूसरे पुराने रोगी हैं। कोरोना की दवाओं का प्रतिकूल प्रभाव गुर्दों पर पड़ा है।
- डॉ. युवराज गुलाटी, नेफ्रोलोजिस्ट, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज