कानपुर में तीसरी लहर की तैयारी में कोरोना के डेल्टा वेरिएंट को लेकर और सतर्कता बरती जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजी विभाग ने रविवार को सात और सैंपल दिल्ली भेेजे हैं। कोरोना का डेल्टा वेरिएंट अधिक खतरनाक है और सांस तंत्र पर घातक हमला करता है।
रोगी के निगेटिव होने के बाद भी तकलीफ बनी रहती है। इस वेरिएंट के हमले से ही रोगियों की संख्या बढ़ी और मौतें अधिक हुईं। रिपोर्ट से इसकी ताकत का अंदाजा लगेगा। कोविड-19 के सामान्य वायरस की चपेट में जो लोग आए थे, उनमें ज्यादातर होम आइसोलेशन में ही ठीक हो गए।
जो दूसरी गंभीर बीमारी की चपेट में थे, उनकी ही मौत हुई, लेकिन जब डेल्टा वेरिएंट का संक्रमण शुरू हुआ तो स्थिति दूसरी लहर में हाथ से निकल गई। रोगियों का सांस तंत्र तेजी से फेल हुआ और दवाओं का असर होने के पहले ही रोगियों की जान चली गई।
20 मई को जब 17 सैंपल आईजीआईबी दिल्ली भेजे गए तो वेरिएंट की पहचान हुई। गाइडलाइन के अनुसार सिर्फ उन्हीं रोगियों के सैंपल लिए गए हैं, जो बहुत दिनों से बीमार हैं। इसके अलावा जो रोगी वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमित हुए हैं। इससे यह अंदाजा लगेगा कि वेरिएंट कितने अधिक दिन तक रोगी को बीमार रखता है।
वैक्सीनेशन से इस पर क्या असर आ रहा है? इसके अलावा सीटी वैल्यू 30 के नीचे वाले रोगियों के सैंपल भेजे जाएंगे। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि दिल्ली से विस्तृत रिपोर्ट आने पर वेरिएंट की ताकत और बदलाव के बारे में और भी पता चलेगा।