आज जब हम घर से निकलते हैं तो पानी साथ नही लेते हैं और सोचते है कि सील बंद बोतल बाहर से खरीद लेंगे जो कि ज्यादा सुरक्षित हैं क्या आप भी यह सोच कर सील बंद बोतल खरीदते कि यह पूरी तरह सूरक्षित हैं तो शयद आप गलत हैं।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल सील बंद बोतलों के 44 फीसदी जांच में मानक(स्टैंडर्ड) के अनुरुप नहीं मिले। इनमे 50 फीसदी से ज्यादा मामलों में पानी का पीएच स्तर ही संतुलित नहीं था। ऐसा पानी पीने से बीमारियां भी हो सकती हैं।
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क्या हैं उपभोक्ता मंत्रालय की रिपोर्ट
उपभोक्ता मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, बोतलबंद पानी के नमूनों में पीएच स्तर में गड़बड़ी, बैक्टीरिया, और ब्रोमेट की मात्रा अधिक होने की शिकायतें सबसे ज्यादा सामने आई हैं। गौरतलब है कि पीएच का अधिक स्तर आखों के लिए हानिकारक हैं जबकि इसके कम होने से त्वचा खराब हो सकती हैं। वहीं, बैक्टीरिया और ब्रोमेट से टाइफाइड और पेट की बीमारियां हो सकती हैं।
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मंत्रालय के अधिकारी ने बताया, फर्जी आईएसआई मार्का इस्तेमाल होने की शिकायतें भी बढ़ी हैं। भारतीय मानक ब्यूरो ने पानी के लिए 40 से ज्यादा मानक बनाए हैं। इसमें खरे न उतरने पर कारवाई होती हैं। पिछले साल बोतलबंद पानी में गड़बड़ी मिलने पर 246 मामलों में कानूनी कारवाई की गई थी।