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विधायक की मांग पर एसडीएम को बनाया गया बिलग्राम नगर पालिका का प्रशासक

Thu, 22 Aug 2019 10:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
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उपजिलाधिकारी सतेंद्र सिंह को बिलग्राम नगर पालिका परिषद का प्रशासक नियुक्त किया गया - फोटो : अमर उजाला
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हरदोई के बिलग्राम में उपजिलाधिकारी सतेंद्र सिंह को जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बिलग्राम नगर पालिका परिषद का प्रशासक नियुक्त किया है। एसडीएम ने कुछ ही घंटे के अंदर बिलग्राम नगर पालिका पहुंचकर प्रशासक का कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। बिलग्राम नगर पालिका के निर्वाचित अध्यक्ष हबीब अहमद एक आपराधिक मामले में न्यायालय में समर्पण करने के बाद से जेल में हैं। 
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वर्ष 2014 में बिलग्राम में हुए एक दंगे की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी। विवेचना के बाद न्यायालय में दाखिल की गई चार्जशीट में सीबीसीआईडी ने हबीब अहमद को भी आरोपी बनाया था। जानलेवा हमला, बलवा, अनुसूचित जाति उत्पीड़न जैसी धाराओं में आरोपी होने के बाद 23 जुलाई को हबीब अहमद खां न्यायालय में हाजिर हो गए थे। न्यायालय ने उन्हें जेल भेज दिया था।

 

इस सबके बीच वर्ष 2017 में नगर पालिका चुनाव में हबीब अहमद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अध्यक्ष का चुनाव लड़े थे। उन्होंने तत्कालीन अध्यक्ष मालती रमन गुप्ता को लगभग 1400 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी। हबीब अहमद के जेल जाने के बाद नगर पालिका की व्यवस्थाएं पटरी से उतर गईं। आलम यह है कि सफाई व्यवस्था तक दुरुस्त नहीं रह सकी। 

क्षेत्रीय विधायक आशीष सिंह आशू ने 31 जुलाई को नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात कर बिलग्राम नगर पालिकाध्यक्ष के जेल में बंद होने की जानकारी देते हुए प्रशासक तैयार किए जाने के संबंध में भी पत्र दिया था। इस पर नगर विकास मंत्री ने एसडीएम बिलग्राम को ही प्रशासक बनाने के निर्देश जारी किए थे।

 
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इसी क्रम में 14 अगस्त को शासन के विशेष सचिव राजीव शर्मा ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर नगर विकास मंत्री के निर्देशों से अवगत कराया था। डीएम पुलकित खरे ने एसडीएम बिलग्राम सतेंद्र सिंह को प्रशासक के पद पर बिलग्राम नगर पालिका भेज दिया है। 

आशू के साथ कदमताल न करना भी पड़ा भारी 
नगर पालिका चुनाव में अध्यक्ष निर्वाचित हुए हबीब अहमद खां को भाजपा के ही एक दूसरे कद्दावर नेता का बेहद करीबी माना जाता है। हबीब अहमद निर्दलीय चुनाव लड़कर अध्यक्ष बने थे, ऐसे में क्षेत्रीय विधायक आशीष सिंह आशू के साथ उनका सामंजस्य भी नहीं बैठ पा रहा था।

एक दो अपवाद छोड़ दें तो दोनों नेता कभी एक मंच पर नजर नहीं आए। हबीब अहमद को इसका नुकसान उठाना पड़ा है। विशेष बात यह है कि अभी तक हबीब अहमद पर आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं ऐसे में संभावना इस बात की भी है कि जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद वह फिर से अपनी कुर्सी पाने में सफल हो जाएं।
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