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एक और हरित क्रांति की राह खोजेंगे विज्ञानी

Thu, 03 Mar 2016 02:15 AM IST
अमर उजाला, ब्यूरो
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तीन दिवसीय (2 से 4 मार्च) उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर साइंस कांग्रेस 2016 की शुरुआत बुधवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कैलाश भवन सभागार में हुई। इसका उद्घाटन आईसीएआर के उप महानिदेशक डॉ. एके सिंह, कुलपति प्रो. एसएल गोस्वामी और डॉ. जी कल्लो ने किया।
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इसमें देश और विदेश (अफगानिस्तान) के विज्ञानियों ने हिस्सा लिया। सबने फसलों का प्रोडक्शन बढ़ाने पर बात रखी और कहा कि दूसरी क्रांति का रास्ता यहीं से निकलेगा। जिस तकनीक, शोध और डेवलपमेंट पर चर्चा होगी, उसे अमल में लाने की कोशिश की जाएगी। कम लागत की फसलों की पैदावार बढ़ाने और आर्गेेनिक फार्मिंग पर भी जोर दिया गया।

सिंचाई पर पानी की बर्बादी रोकने पर चर्चा हुई। भारत में 80 फीसदी पानी सिंचाई पर खर्च किया जाता है। इस मौके पर कृषि से संबंधित कुछ किताबों का विमोचन भी हुआ। आईसीआर के उप महानिदेशक प्रो. एके सिंह सम्मानित किए गए। डॉ, वीके त्रिपाठी ने प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन और डॉ. संजय कुमार ने आर्गेनिक फार्मिंग की जानकारी दी। संयोजक डॉ. विजय कुमार यादव ने धन्यवाद दिया।  
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नए केवीके
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने यूपी में 22 नए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) स्थापित करने का फैसला किया है। इसके लिए राज्य सरकार से जमीन मांगी गई है। एक केवीके के लिए करीब 50 एकड़ जमीन की जरूरत है। केवीके के माध्यम से ही खेती की नई तकनीक और उन्नत प्रजाति के बीज किसानों तक पहुंचाए जाएंगे।

अभी यूपी में 68 केवीके हैं। अब इनकी संख्या 90 हो जाएगी। नए केवीके में 132 विज्ञानियों की तैनाती की जाएगी। विज्ञानी खेतों तक जाएंगे और किसानों को उचित सलाह देंगे। हरदोई, रायबरेली, अमेठी, गोरखपुर, हापुड़ और श्रावस्ती में भी नए केवीके स्थापित किए जाने हैं।

दिन में पक जाएगी अरहर की फसल
265 दिन में पकने वाली अरहर की फसल अब 120 दिन में पक जाएगी। कृषि विज्ञानियों ने अरहर की हाइब्रिड प्रजाति विकसित कर ली है। इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है। जल्द ही बीज किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। अरहर का हाइब्रिड बीज रोग प्रतिरोधी है। इससे पैदावार बढ़ने की उम्मीद है। अभी अरहर की जो प्रजातियां हैं, उनकी प्रति हेक्टेयर पैदावार 25 क्विंटल है। हाइब्रिड बीज से प्रति हेक्टेयर पैदावार 32 क्विंटल हो जाएगी।
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