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क्लीन स्कूल-ग्रीन स्कूल योजना में घपलेबाजी, ऐसे खुली पोल

Sat, 26 Aug 2017 07:54 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
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‘क्लीन स्कूल-ग्रीन स्कूल’ योजना की धनराशि से फर्नीचर खरीद में गड़बड़ी का मामला सामना आया है। मुख्यालय के जीआईसी और जीजीआईसी में करीब 7-7 लाख रुपये का फर्नीचर मुरादाबाद की फर्म से खरीदा गया है। जांच में सामान घटिया और दाम भी बाजार से कई गुना ज्यादा हैं। 
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वर्ष 2016 में जीआईसी और जीजीआईसी को 50-50 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें 26 लाख रुपये निर्माण और शेष पैसा फर्नीचर आदि में खर्च होना था। शासन स्तर से ही फर्नीचर आपूर्ति का ठेका भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ, लखनऊ और यूपी उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड, मुरादाबाद को दिया गया।

हर कालेज को फर्नीचर के लिए 7.30 लाख रुपये दिए गए। इसमें 5 स्टील की आलमारी, 10 विजिटर चेयर, 2 प्रिंसिपल चेयर, दो नोटिस बोर्ड, 5 स्टील रैक, 3 लैब डेमो टेबल, 2 बुक केस, 2 कंप्यूटर टेबल, एक प्रिंसिपल टेबल, 5 क्लर्क टेबल, 5 आफिस चेयर, दो पिजिन होल अलमारी, एक मैगजीन स्टैंड, 9 कंप्यूटर स्टूल और दो ह्वाइट बोर्ड खरीद जाने थे। फर्म ने करीब साल भर बाद आधा-अधूरा फर्नीचर भेजा। प्रधानाचार्य आरके सिंह ने फर्नीचर की गुणवत्ता जांचने के लिए कालेज के शिक्षकों की पांच सदस्यीय टीम गठित कर दी। टीम सदस्यों में शिवमोहन, घनश्याम गुप्ता, दयाराम, कालिका प्रसाद, महेंद्र प्रताप सिंह शामिल थे। 
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टीम ने फर्नीचर की जांच की। लकड़ी की कुर्सियां व स्टूल आदि बेहद घटिया मिले। जिसमें घुन लग चुका है। लाइब्रेरियन टेबल, रीडिंग टेबल भी घटिया मिले। प्लाई बोर्ड की मोटाई भी कम थी। पता चला है कि फर्नीचर की खरीद बाजार से तीन गुना ज्यादा में की गई है। एक स्टील आलमारी की कीमत बाजार में लगभग 6 हजार रुपये है पर खरीदी 16 हजार में गई। इसी तरह विभिन्न साइजों की कंप्यूटर मेज 5-7 हजार रुपये में खरीदी गई है। जबकि बाजार में इसकी कीमत 3 से 4 हजार रुपये की बताई जा रही है। जीआईसी प्रधानाचार्य आरके सिंह ने इस बाबत बताया कि घटिया सामग्री की शिक्षकों द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट डीआईओएस को भेजी गई है।
 
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दोबारा जांच में भी मिली शिकायत

जीआईसी बांदा में खरीदे गए फर्नीचर की जांच करती शिक्षकों की समिति। - फोटो : अमर उजाला
दोबारा जांच में भी मिली शिकायत
जिला विद्यालय निरीक्षक हिफजुर्रहमान ने 23 अगस्त को जिलाधिकारी के आदेश पर उद्योग केंद्र जिला महाप्रबंधक और आरईएस अवर अभियंता से दोबारा फर्नीचर की गुणवत्ता की जांच कराई। इस रिपोर्ट में भी कुर्सी, मेज और अलमारियों की गुणवत्ता बेहद घटिया मिली। 

वाटर कूलर चंद दिनों में खराब
योजना के तहत विद्यालय में लगाए गए वाटर कूलर और आरओ लगाने के कुछ दिन बाद ही दगा दे गए। प्रधानाचार्य ने आरओ आदि लगाने के लिए कार्यदाई संस्था आरईएस को ही जिम्मेदारी सौंपी थी। करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च होने के बावजूद बच्चों को टंकी का उबला पानी पीना पड़ रहा है। लेकिन इसकी जांच पर कॉलेज प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।  

-जीआईसी-जीजीआईसी में घटिया सामान की आपूर्ति, दाम कई गुना ज्यादा दिए
-समिति की जांच में खुली घोटाले की पोल

 
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