फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sawan 2023: अनोखी है तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा, यहां दर्शन कर माथा टेकने से भरती है भक्तों की झोली

Mon, 10 Jul 2023 04:02 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा

सार

Sawan 2023: सावन के महीने में शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लग रहा है। इन्हीं में महोबा जिला स्थित शिव तांडव मंदिर में दूरस्थ स्थानों से लोग दर्शन पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
नृत्य करती शिव प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महोबा जिले में गोरखगिरि पहाड़ के नीचे स्थापित तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा उत्तर भारत में अपने किस्म की अनोखी प्रतिमा है। मान्यता है कि शिव प्रतिमा के दर्शन कर माथा टेकने से भक्तों की झोली भरती है। यहां महाशिवरात्रि व सावन के सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ जुटती है।

विज्ञापन


शिव प्रतिमा का निर्माण दसवीं से 11वीं शताब्दी के बीच चंदेल शासक ने कराया था। ग्रेनाइट शिला पर 15 फीट ऊंची दसभुजी तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा सहज ही भक्तों को आकर्षित करती है। इतिहासकार डाॅ. एलसी अनुरागी बताते हैं कि इसका वर्णन कर्मपुराण में भी मिलता है। ऐसी ही प्रतिमा दक्षिण के ऐलोरो, हेलबिका और दारापुरम में भी है। यहां जिले के अलावा दूसरे जनपदों से भी लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। दर्शन को लेकर शिव तांडव मंदिर में काम कराया जा रहा है। आकर्षक लाइटिंग व बड़ी मरकरी लगाए जाने से रात में मंदिर दूधिया रोशनी से जगमग रहता है।

Trending Videos

ऐसे पहुंचे मंदिर
शहर के पुलिस लाइन मार्ग से दाहिनी ओर सीसी सड़क निर्मित है। मुख्य सड़क पर ही शिव तांडव मंदिर जाने के लिए बोर्ड लगा है। आधा किमी चलने पर पहाड़ के पास विशाल मंदिर स्थापित है। यहीं से सिद्धबाबा जाने का एक किमी लंबा रास्ता है। शिव तांडव मंदिर गोरखगिरि का प्रवेश द्वार भी कहलाता है।
विज्ञापन

पहले करते मंदिर की सफाई फिर शिवभक्ति में हो जाते लीन
समाजसेवा का बीड़ा उठाए तारा पाटकर प्रतिदिन सुबह पांच बजे स्नान करने के बाद नंगे पैर गोरखगिरि पर्वत के ऊपर एक किमी ऊबड़-खाबड़ पथरीले रास्ते से सिद्धबाबा मंदिर जाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। चाहे सर्दी हो या गर्मी और बरसात। वह गोरखगिरि के प्रवेश द्वार शिव तांडव मंदिर से पूजा-पाठ शुरू करते हैं। सबसे पहले मंदिर पहुंच वहां की साफ-सफाई करने के बाद शिवभक्ति में लीन हो जाते हैं। इसके बाद पहाड़ की चढ़ाई कर सिद्धबाबा, नागराज व गोरखेश्वर महादेव की आराधना करते हैं। हर अमावस्या और पूर्णिमा को उनके नेतृत्व में भक्त पांच किमी लंबी परिक्रमा लगाते हैं। यह सिलसिला करीब 10 वर्षों से लगातार जारी है। तारा पाटकर बताते हैं कि सुबह उठकर मंदिर की साफ-सफाई व शिवभक्ति से उन्हें अलग प्रकार का सुकून मिलता है।

यह भी पढ़ें- खेरेश्वर मंदिर में सुबह पट खुलते ही पूजित मिलता है शिवलिंग, आज भी अश्वत्थामा आते हैं पूजन करने
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें