महाभारत काल के समय से स्थापित है मंदिर
सोमवार के दिन इस धाम में रात से ही श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग लगभग 5 हजार वर्ष पुराना है। लोगों का मानना है कि यह शिवलिंग को महाभारत काल के समय से स्थापित है। मंदिर के पुजारी कमलेश गिरी ने बताया कि यह मंदिर काफी पुराना है। खेरेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग को किसी व्यक्ति ने स्थापित नहीं किया है।
सुबह मंदिर के पट खुलते हैं, तो पहले से ही पूजा हुई होती है
हालांकि समय-समय पर मंदिर का कायाकल्प होता रहा है। यहां विराजमान शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ है, जिसके कारण इस धाम को स्वंम्भू के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर आज भी अश्वत्थामा पूजा करने के लिए आते हैं। लोगों का कहना है कि कई बार यहां कैमरे लगाए गए लेकिन, जब भी सुबह मंदिर के पट खुलते हैं तब मंदिर में पहले से ही पूजा हुई होती है।
मान्यता है कि अश्वत्थामा करते हैं पूजा
शिवलिंग के ऊपर फूल चढ़े मिलते हैं और अभिषेक हुआ मिलता है। महंत के मुताबिक महाभारत काल के युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने पांडवों के पुत्रों की चलते हत्या कर दी भीम ने अश्वत्थामा के माथे में लगी मणि निकालकर उसे शक्तिहीन बना दिया। भगवान श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया था कि वह धरती पर तब तक पीड़ा बस जीवित रहेगा, जब तक स्वयं महादेव से उसके पापों से मुक्ति न दिला दें।