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Sawan 2022: खेरेश्वर मंदिर में सुबह पट खुलते हैं, तो पूजित मिलता है शिवलिंग, कहते हैं अश्वत्थामा करता है पूजा

Wed, 20 Jul 2022 09:09 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

सावन के महीने में शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लग रहा है। इन्हीं में शिवराजपुर स्थित खेरेश्वर मंदिर में दूरस्थ स्थानों से लोग दर्शन पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। इस मंदिर में रोजाना सुबह पट खुलने पर शिवलिंग पर विशेष फूल चढ़ा हुआ और पूजन हुआ मिलता है।
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खेरेश्वर महादेव मंदिर, कानपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैसे तो सावन माह में क्षेत्र के सभी देवा लयों की अपनी-अपनी आस्था और महत्व है। लेकिन इस महीने में शिवराजपुर के खेरेश्वर मंदिर का अपना विशेष महत्व है। सावन के सोमवार के पर्व को लेकर खेरेश्वर महा मंदिर के कपाट पूरी रात भक्तों के लिए खुले रहेंगे। छतरपुर गांव स्थित खेरेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास द्वापर युग से है। महाभारत काल में कौरव पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने स्वयं खेरेश्वर महादेव की तपस्या की थी।

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प्रतिवर्ष दर्शन के लिए आते हैं लाखों श्रद्धालु
खेरेश्वर मंदिर शिवराजपुर कस्बे से 2 किलोमीटर उत्तर की तरफ स्थित है। सावन के पूरे माह यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने आते हैं। इस मंदिर में शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है, कि सावन माह में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होतीं हैं। गंगा नदी के तट पर स्थित बाबा भोलेनाथ के खेरेश्वर मंदिर में दूरस्त स्थानों से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन-पूजन करने आते हैं।

महाभारत काल के समय से स्थापित है मंदिर
सोमवार के दिन इस धाम में रात से ही श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग लगभग 5 हजार वर्ष पुराना है। लोगों का मानना है कि यह शिवलिंग को महाभारत काल के समय से स्थापित है। मंदिर के पुजारी कमलेश गिरी ने बताया कि यह मंदिर काफी पुराना है। खेरेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग को किसी व्यक्ति ने स्थापित नहीं किया है। 

सुबह मंदिर के पट खुलते हैं, तो पहले से ही पूजा हुई होती है
हालांकि समय-समय पर मंदिर का कायाकल्प होता रहा है। यहां विराजमान शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ है, जिसके कारण इस धाम को स्वंम्भू के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यहां पर आज भी अश्वत्थामा पूजा करने के लिए आते हैं। लोगों का कहना है कि कई बार यहां कैमरे लगाए गए लेकिन, जब भी सुबह मंदिर के पट खुलते हैं तब मंदिर में पहले से ही पूजा हुई होती है।

मान्यता है कि अश्वत्थामा करते हैं पूजा
शिवलिंग के ऊपर फूल चढ़े मिलते हैं और अभिषेक हुआ मिलता है। महंत के मुताबिक महाभारत काल के युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने पांडवों के पुत्रों की चलते हत्या कर दी भीम ने अश्वत्थामा के माथे में लगी मणि निकालकर उसे शक्तिहीन बना दिया। भगवान श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया था कि वह धरती पर तब तक पीड़ा बस जीवित रहेगा, जब तक स्वयं महादेव से उसके पापों से मुक्ति न दिला दें।
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प्रशासन ने किए सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त
तभी से यह कहा जाता है कि महादेव से मुक्त की प्रार्थना के लिए यहां अश्वत्थामा हर रोज सबसे पहले जल चढ़ाने आते हैं। वहीं, दूसरी ओर पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए हैं। थानाध्यक्ष जितेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि गंगा रोड से किसी भी वाहन के आने-जाने पर प्रतिबंध रहेगा। सभी वाहन बैरीकेेड क्रॉसिंग से होकर मंदिर के लिए पहुंचेंगे। साथ ही चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है।
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