इस वजह से वे जुलूस में शामिल नहीं हुए। गौरतलब है कि भाजपा से महापौर प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर सांसद पचौरी की बेटी नीतू सिंह का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ था। उन्होंने पांच दिन पहले से ही नामांकन पत्र लेकर पूरी तैयारी कर रखी थी। पार्टी के अंदर भी इसे लेकर एक स्वर से यही बात आ रही थी कि इस बार नीतू सिंह ही भाजपा की महापौर प्रत्याशी होंगी, लेकिन नामांकन के ठीक एक दिन पहले देर शाम पार्टी से जारी सूची में दोबारा प्रमिला पांडेय का नाम आने से पार्टी के अंदर हलचल मच गई। किसी को समझ ही नहीं आया कि अचानक से यह सब कैसे हुआ। इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि नीतू सिंह के नामांकन को लेकर पूरी तैयारी हो चुकी थी।
किसको कहां रहना है, कौन क्या काम करेगा इसकी भी जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं को दे दी गई थी। इसके बावजूद अचानक से टिकट कटने से पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता सन्नाटे में दिखे। नीतू सिंह दरअसल संघ की पृष्ठभूमि से आती हैं। उनके नाम को प्रत्याशी के रूप में आगे लाने में कहीं न कहीं संघ की भूमिका भी बताई जा रही है। इसके बावजूद ऐन वक्त पर नीतू सिंह का टिकट कटने से अब पार्टी के अंदर नए तरीके की खींचतान शुरू हो गई है। पार्टी के फैसले से नाखुश सांसद पचौरी ने यह भी कहा कि वे भ्रष्टाचार के हमेशा खिलाफ रहे हैं, आगे भी रहेंगे।