अफसरों को भनक तक नही, बाबू की मिली भगत से हुआ खेल
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। परिवहन विभाग में दलालों की पैठ किस कदर हावी है की आरटीओ और एआरटीओ को इसकी भनक तक नही लगती। 4.76 लाख रुपये के 11 चालानों का जुर्माना बकाया होने के बावजूद ट्रक की एनओसी जारी कर दी गई। इतना ही नहीं, एनओसी जारी हुए सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन न तो इसे अब तक निरस्त किया गया है और न ही इस पूरे मामले में किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की गई है।जब कि कानपुर एआरटीओ ने पत्र भेजकर कार्रवाई करने को कहा। इसके बाद उन्नाव एआरटीओ ने संज्ञान तक नही लिया।
ट्रक संख्या यूपी-35-एटी-1659 के खिलाफ ओवरलोडिंग समेत विभिन्न मामलों में कुल 4.76 लाख रुपये का जुर्माना बकाया था। इसके बावजूद 23 दिसंबर 2025 को उन्नाव एआरटीओ कार्यालय से वाहन की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर दी गई। सूत्रों की मानें तो इतनी बड़ी देनदारी होने के बाद एनओसी जारी होना बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब वाहन के मालिकाना हक के हस्तांतरण (आरसी ट्रांसफर) के लिए खरीदार संजू ने कानपुर एआरटीओ प्रशासन कार्यालय में ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन की जांच के दौरान एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार को एनओसी पर संदेह हुआ। दस्तावेजों के सत्यापन में पता चला कि ट्रक पर 11 चालानों के रूप में 4.76 लाख रुपये का जुर्माना अभी भी बकाया है, जबकि एनओसी पहले ही जारी कर दी गई थी। ऐसे में उन्नाव आरटीओ कार्यालय में तैनात बाबुओं के काम पर सवाल खड़े हो गए। जब वाहन पर इतनी बड़ी देनदारी थी तो एनओसी जारी कैसे हुई? हैरानी की बात यह है कि सात महीने बाद भी न तो गलत तरीके से जारी की गई एनओसी को निरस्त किया गया है और न ही किसी कर्मचारी की जवाबदेही तय की गई है। इस पूरे मामले में कार्यालय के कर्मचारी से लेकर अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
वर्जन
कार्यालय के प्रधान सहायक राकेश पाल को नोटिस जारी किया गया है अभी तक जवाब नहीं आया है। जवाब मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
श्वेता वर्मा, एआरटीओ प्रशासन