इटावा में सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रैगिंग में एक संकाय विभागाध्यक्ष व दो वार्डन के निलंबन से डॉक्टर खफा हो गए हैं और सातवें वेतनमान के लिए रेजीडेंट डॉक्टर और चिकित्सा से जुड़े कर्मचारियों ने आंदोलन छेड़ रखा है। इन कर्मचारियों ने दो अगस्त से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
अगर हड़ताल हुई तो मरीजों की मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी। सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय के चिकित्सा से जुड़े कर्मचारी 22 अगस्त से काली पट्टी बांधकर दो घंटे धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को धरना देने के बाद बाइकों पर जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
मांग पूरी नहीं की गई तो इमरजेंसी व आईसीयू छोड़ सभी काम बंद कर देंगे
इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट सतेंद्र नाथ शुक्ला को ज्ञापन सौंपा। कंबाइंड एम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह यादव, नर्सिंग एसोसिएशन अध्यक्ष उमेश सिसोदिया, रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. ने बताया कि संजय गांधी पीजीआई लखनऊ के रेजीडेंट डॉक्टरों व कर्मचारियों के समान सातवें वेतनमान का लाभ मिनी पीजीआई सैफई में भी देने का अनुमोदन एक जुलाई 2017 को किया गया था।
किंतु दो साल बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है। इसी मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। अगर पहली सितंबर तक मांग पूरी नहीं की गई तो इमरजेंसी व आईसीयू छोड़ सभी काम बंद कर देंगे। वहीं वार्डन डा. गणेश कुमार वर्मा, गयासुद्दीन हैदर के निलंबन से अधिकारियों में नाराजगी रैगिंग मामले में दो वार्डन के निलंबन से चिकित्सा विश्वविद्यालय के अधिकारियों में नाराजगी है। इस नाराजगी की भनक लगने पर बुधवार को कुलपति डॉ राजकुमार ने अधिकारियों की बैठक बुलाई थी किंतु कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
ओपीडी में रोज आते हैं 4 से 5 हजार मरीज, आसपास जिलों से बुलाए जाएंगे डॉक्टर
चिकित्सा विश्वविद्यालय की ओपीडी में प्रतिदिन चार से पांच हजार मरीज आते हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज इटावा के अलावा मैनपुरी, एटा, औरेया, कन्नौज, फर्रुखाबाद फिरोजाबाद जिलों के होते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में प्रतिनिधि 200 से 300 मरीज भर्ती होते हैं। अगर रेजीडेंट डॉक्टर और चिकित्सा कर्मियों ने हड़ताल की तो ओपीडी में हाहाकार मच जाएगा।
डीन डॉक्टर आदेश कुमार ने बताया कि हड़ताल होने पर 250 फैकल्टी समेत 300 विशेषज्ञ डॉक्टर व्यवस्था संभालंगे। इसके अलावा शासन के जरिये चिकित्सा विभाग के इटावा और आसपास के डॉक्टरों को भी बुला लिया जाएगा। किसी भी स्थिति में मरीजों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
नियमानुसार नहीं कर सकते हड़ताल
डीन डॉक्टर आदेश कुमार ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार चिकित्सीय पेशे से जुड़े लोग हड़ताल नहीं कर सकते हैं। उनकी हड़ताल से किसी की जान पर बन सकती है। वह अपनी मांगे मनवाने के लिए विरोध प्रदर्शन समेत अन्य तरीके अख्तियार कर सकते हैं लेकिन हड़ताल पर नहीं जा सकते हैं। हड़ताल करने की स्थिति में सरकार एस्मा लागू कर नए डॉक्टरों की नियुक्ति कर सकती है।