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रूस-यूक्रेन जंग: चमड़ा उद्योगों का बुरा हाल, 11 महीने में करोड़ों का निर्यात प्रभावित, मीट उद्योग काे भी झटका

Fri, 27 Jan 2023 10:50 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव

सार

रूस-यूक्रेन की जंग में उन्नाव का चमड़ा उद्योग बुरी हालत में है। 11 महीने की जंग में ही सौ करोड़ का निर्यात प्रभावित हुआ है। उद्यमियों का कहना है कि जंग और खिंची, तो यूरोपीय और एशियाई देशों का व्यापार भी टूटेगा।
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रूस और यूक्रेन युद्ध - फोटो : ANI
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विस्तार
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रूस और यूक्रेन में जारी युद्ध को एक साल पूरा होने वाला है। इस जंग की वजह से उन्नाव का चमड़ा उद्योग भी मुश्किलों में है। जिले को औद्योगिक क्षेत्र बंथर और दही चौकी में सौ टेनरी और चर्म उत्पाद बनाने वाले बड़े उद्योग हैं, जिन पर प्रभाव पड़ा है।

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रूस में हर साल औसतन 150 करोड़ और यूक्रेन को हर साल औसतन आठ करोड़ के चर्म उत्पादों का निर्यात होता रहा है। लेकिन एक साल जारी जंग में एक सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। फरवरी 2022 से रूस और यूक्रेन देश के बीच छिड़ी जंग की आंच जिले के चमड़ा उद्योग को झुलसाने लगी है।
इन दोनों देशों से व्यापार प्रभावित है। कानपुर चर्म निर्यात परिषद के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2020-21 में रूस को 160 करोड़ के चर्म उत्पादों का निर्यात हुआ, जबकि वित्तीय वर्ष 2019-20 में निर्यात 133 करोड़ रहा था। वहीं यूक्रेन भी चर्म उत्पादों का बड़ा बाजार है।

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यहां वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6.82 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2019-20 में नौ करोड़ का निर्यात हुआ था।  युद्ध के इन 11 महीनों में करीब 100 करोड़ का व्यापार प्रभावित होने से उद्यमियों में निराशा है। उनका कहना है कि अगर लड़ाई और लंबी चली तो सभी एशियाई और यूरोपीय देशों का व्यापार प्रभावित होगा।

मीट उद्योग को भी झटका
जिले में संचालित सात स्लाटर हाउस पैकेट बंद मांस का निर्यात करते हैं। इनमें रूस भी शामिल है। बड़े मीट निर्यातक इकाईयों में शामिल इंडाग्रो फूड्स के मैनेजर नीरज कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-2020 में रूस को 80 करोड़ का निर्यात हुआ था। जबकि 2020-21 में कोरोना के चलते व्यापार प्रभावित होने से यह घटकर पचास करोड़ रह गया। पिछले 11 महीने में दस करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है।
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जितनी लंबी जंग, उतना ज्यादा नुकसान- ताज आलम
उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर के अध्यक्ष मो. ताज आलम ने बताया कि कोरोना की मार से चरमराया चमड़ा उद्योग को उबारने की कोशिश कर ही रहे थे तभी यह जंग छिड़ गई। उन्होंने बताया कि जंग जितनी लंबी चलेगी चर्म निर्यात उतना ज्यादा प्रभावित होगा। बताया कि इसके कारण यूरोपीय देशों के निर्यात पर असर पड़ा है।
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