आरएसएस की चार दिवसीय विशेष गतिविधियों का मंगलवार को समापन हो गया। आखिरी दिन पूर्वी क्षेत्र के प्रांत स्तरीय पदाधिकारियों से सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि जैसे जैसे समय परिवर्तन हो रहा है, इसका असर संघ पर भी पड़ने लगा है।
ऐसे में इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि आरएसएस को स्थापित करने के मूल्यों से कोई समझौता न हो। संघ को इतना विस्तार दो कि सब उसी में शामिल हो जाएं। गली-गली में शाखा लगने लगे, हर जुबान से नमस्ते सदा वत्सले गूंजने लगे।
बिठूर मार्ग स्थित महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज में हुई बैठक में संघ प्रमुख ने कहा कि संघ के हर कार्यकर्ता का यह दायित्व है कि वह अपने आसपास का दायरा बड़ा करे। साथ में यह भी आवश्यक है कि जिन लोगों को इससे जोड़ा जाए, उन्हें संघ की मूल भावना से पूर्व में ही परिचय जरूर कराया जाए।
संघ की विचारधारा को लेकर अक्सर जो भी बातें उठती हैं, उनका समाधान करने के लिए हमें कोई विशेष कार्य नहीं करना है। सिर्फ अपने मूल कार्य को जारी रखना है। बेहतर राष्ट्र निर्माण की दिशा में इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता है।
हम अपने विचार, सद्गुणों को जितना एक दूसरे के संपर्क में लाएंगे, उसमें उतनी ही मजबूती आएगी। बैठक के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह संकल्प भी लिया कि वे सिर्फ कार्य करें, इसका प्रचार स्वत: होता जाएगा। क्योंकि सिर्फ प्रचार से तरह तरह की भ्रांतियां फैलती हैं।
संघ कार्यकर्ता को जमीन पर रहकर ठोस कार्य करना है। जिसका अनुसरण हम सभी करते आ रहे हैं। आगे भी इसमें किसी तरह की कमी नहीं आने पाए। बैठक तीन चरणों में पूरी हुई। सुबह सभी ने पहले प्रार्थना की। फिर वृत्त निवेदन के साथ ही बातचीत का दौर शुरू हुआ।
आखिर में संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि यहां से जाने के बाद सभी को नई ऊर्जा से काम करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम समापन के उपरांत संघ प्रमुख बुधवार सुबह स्थानीय प्रमुख पदाधिकारियों से मिलने के बाद यहां से प्रस्थान करेंगे।