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सलमान जैसे सुपरस्टार करते थे Rotomac का विज्ञापन, अब नीलाम हो रही मालिक की संपत्ति

Thu, 07 Sep 2017 07:27 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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रोटोमैक पेन लॉन्चिंग के दौरान सलमान खान के साथ विक्रम कोठारी और उनका बेटा (पुरानी तस्वीर)
बॉल पेन्स (कलम) में सबसे मशहूर इंडियन कंपनी Rotomac Group के मालिक विक्रम कोठारी के बुरे दिन खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। जिस कंपनी के प्रोडक्ट्स का एड (विज्ञापन) बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान जैसे सिलेब्रिटीज करते थे आज उस कंपनी की हालत इतनी खराब होती जा रही है कि मालिक के घर तक नीलाम होने लगे हैं।   
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रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी
बैंकों के कर्जदार रोटोमैक ग्रुप के मालिक विक्रम कोठारी की पत्नी साधना कोठारी के नाम कानपुर के गुटैया स्थित इंद्रधनुष अपार्टमेंट की नौंवी मंजिल में बना एक फ्लैट (नंबर-902) मंगलवार को करीब 80 लाख रुपये में गुरुवार को नीलाम हो गया। इसी तरह विक्रम कोठारी के पुत्र राहुल कोठारी के नाम बैकुंठपुर गांव में कई हेक्टेयर में फैला फार्म हाउस, खाली जमीन आदि थी। ये सब करीब 13.50 करोड़ रुपये में नीलाम हो गई। फार्म हाउस को शहर की रिद्धि श्री फर्म ने खरीदा है।  
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रोटोमैक पेन के एड के दौरान सलमान की फोटो
वहीं, विक्रम कोठारी के माल रोड स्थित रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (24/6 तुलसा कोठी माल रोड, यूनिट नंबर-201) के खरीदार नहीं मिले। इलाहाबाद बैंक की ओर से मंगलवार को इसकी ई-नीलामी करवाई गई थी। बैंक ने बोली लगाने के लिए इस संपत्ति की न्यूनतम कीमत तीन करोड़ 95 लाख रुपये निर्धारित की थी। बताते हैं कि बोली लगाने के लिए सिर्फ दो फर्में सामने आईं। इन्होंने निर्धारित रकम से कम की बोली लगाई। इस कारण मंगलवार को इसकी नीलामी नहीं हो सकी।

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रोटोमैक पेन के एड में सलमान
बैंक के सूत्र बताते हैं कि खरीदार न मिलने की वजह से बोली के लिए निर्धारित कीमत में पांच फीसदी की कमी की जाएगी। अनुमानित इसकी नई कीमत तीन करोड़ 75 लाख रुपये होगी। जल्द ही बैंक नीलामी की तारीख तय करेगा। 
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रोटोमैक पेन के एड में सलमान
इस कारण नहीं मिले खरीदार 
नीलामी की यह सरकारी प्रक्रिया है। इसलिए सभी लेनदेन नंबर एक में होने हैं। महंगी रजिस्ट्री और बड़ा लेनदेन होने की वजह से इसकी डीटेल आयकर विभाग को भी जाएगी। नोटबंदी के असर, कालेधन पर निगरानी और  नकद लेनदेन से परहेज जैसी वजहों से इसके खरीदार नहीं मिले। इसके अलावा एक वजह ये भी सामने आ रही है कि दस्तावेजों में जमीन का जितना एरिया दर्ज है निर्माण उसके एक तिहाई में ही हो सकेगा। शेष जगह ओपन एरिया के तहत छोड़ना पड़ेगा। इस लिहाज से भी यह महंगा सौदा है। दस्तावेजों में 361 वर्गमीटर है। निर्माण 125 वर्गगज में ही हो सकेगा।
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