ग्रीनपार्क में बल्लेबाजी करते रिंकू सिंह।
- फोटो : आर्काइव
कानपुर। बीसीसीआई की सबसे प्रतिष्ठित घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश की टीम इस बार नए जोश के साथ मैदान में उतरी है। दो दशक से खिताब से दूर उप्र की टीम इस बार इंतजार को खत्म करने की कोशिश में है।
कप्तान करन शर्मा के नेतृत्व में टीम में प्रियम गर्ग, आर्यन जुयाल, अभिषेक गोस्वामी, शिवम मावी, विप्रराज निगम और रिंकू सिंह जैसे भरोसेमंद खिलाड़ी शामिल हैं जिन पर आने वाले मैचों में बेहतर प्रदर्शन का दारोमदार है।
टी-20 क्रिकेट में लगातार सफलता के बाद रिंकू सिंह ने रणजी ट्रॉफी के पहले मैच में आंध्र प्रदेश के खिलाफ शानदार 165 रन की पारी खेली थी। अब 25 अक्टूबर को ग्रीन पार्क स्टेडियम में होने वाले मुकाबले में रिंकू एक बार फिर टीम को जीत की राह पर ले जाने के लिए उतरेंगे।
उत्तर प्रदेश की रणजी यात्रा 2005-06 में अपने शिखर पर थी जब मोहम्मद कैफ की कप्तानी में टीम ने बंगाल को हराकर पहली बार ट्रॉफी अपने नाम की थी। इसके बाद 2007-08 में यूपी की टीम फाइनल तक पहुंची लेकिन दिल्ली से हारकर खिताब से वंचित रह गई।
2015 से 2018 के बीच टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं रहा और वह लीग दौर से ही बाहर होती रही। टीम के मुख्य कोच अरविंद कपूर का कहना है कि इस बार टीम का संयोजन पूरी तरह नया है। आंध्र प्रदेश के खिलाफ मैच में शुरुआती तीन दिन पिछड़ने के बावजूद चौथे दिन खिलाड़ियों ने शानदार वापसी की।
इस प्रदर्शन से टीम का मनोबल बढ़ा है। टीम अब आगामी मैचों में नई रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी। इस सत्र का पहला लक्ष्य नॉकआउट चरण में जगह बनाना है। इसके बाद खिताब की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया जाएगा। (संवाद)