वर्कलोड की समस्या से जूझ रही स्माल आर्म्स फैक्ट्री को फिर से एक बार रिवॉल्वर बनाने के काम में एकाधिकार देने की तैयारी शुरू हो गई है। हाल ही में शहर आए रक्षा सचिव ने यहां दिक्कतों को देखते हुए इस बात के संकेत दिए हैं।
खबर है कि इस मुद्दे पर ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड और रक्षा मंत्रालय के बीच उच्चस्तरीय वार्ता आरंभ हो गई है। जल्द ही इस बाबत कोई फैसला हो सकता है।
बीते शुक्रवार को सचिव (डिफेंस प्रोडक्शन) जी. मोहन कुमार ने शहर की सभी आयुध फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया था। सूत्रों के मुताबिक स्माल आर्म्स फैक्ट्री में आधुनिकीकरण की सुस्त रफ्तार पर उन्होंने नाराजगी जताई थी।
रक्षा सचिव ने कहा था कि फैक्ट्री को चाहिए कि उच्च तकनीकि और गुणवत्ता के हथियारों का निर्माण यहां किया जाए, जिससे आर्मी की जरूरतों को पूरा किया जा सके। उन्होंने साथ ही यहां कम वर्क लोड पर चिंता भी जताई थी।
इस बिंदु पर आपत्ति भी जताई थी कि एक ही उत्पाद देश की तमाम फैक्ट्रियों में बनाए जाते हैं। इसमें खासतौर पर उन्होंने रिवॉल्वर का जिक्र करते हुए स्माल आर्म्स फैक्ट्री के अलावा अंबरनाथ और फील्ड गन फैक्ट्री में भी यही उत्पाद बनते हैं।
सूत्रों की मानें तो बातों-बातों में उन्होंने अन्य आयुध कारखानों में रिवॉल्वर का काम एसएएफ में शिफ्ट करने का संकेत दिया। हालांकि अभी इस मुद्दे पर लिखापढ़ी में कोई कवायद शुरू नहीं हुई है।
मगर बोर्ड और मंत्रालय के बीच चर्चा होने की बात फैक्ट्री के अधिकारिक सूत्र बता रहे हैं। ऐसा होता है एसएएफ की मौजूदा परिस्थितियों में काफी सुधार हो सकता है।
कम बिक्री भी प्रमुख वजह
असलहा लाइसेंस को लेकर हुई सख्ती के बाद कानपुर की दोनों फैक्ट्रियों से होने वाली रिवॉल्वर की बुकिंग में गिरावट आई है। इससे सालाना लक्ष्य तो प्रभावित होना तय है।
गौरतलब है कि एसएएफ में मार्क-4 और मार्क-5 के अलावा अनमोल रिवॉल्वर बनाया जाता है, जबकि फील्ड गन में मार्क-4 और हल्का निर्भीक रिवॉल्वर बनाया जाता है।
रक्षा सचिव ने एक उत्पाद कई फैक्ट्रियों में बनने की बात जरूर कही थी, मगर ऐसा अभी तय नहीं हुआ है कि किस फैक्ट्री का लोड कहां शिफ्ट होगा। इस बारे में आयुध निर्माणी बोर्ड निर्णय लेगा।
राकेश कुमार, महाप्रबंधक (फील्ड गन फैक्ट्री)