कनोडिया कैपिटल एंड मैनेजमेंट प्रा. लि. कंपनी में बेहद शातिराना ढंग से हुई आयकर चोरी के प्रमाण मिले हैं। पता चला है कि बीते तीन सालों में ट्रेडिंग कारोबार मे लगभग 53 करोड़ रुपए का घाटा होना दिखाया गया।
इस राशि को उन कंपनियों के मुनाफे में समायोजित कर दिया गया, जिनसे खासा फायदा हो रहा था। नतीजा 53 करोड़ रुपए पर आयकर नहीं देना पड़ा। इस कंपनी में सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश चंद्र जैन की बहू करुणा प्रशांत जैन भी निदेशक रह चुकी हैं।
अहमदाबाद में आयकर विभाग ने कमोडिटी ट्रेडिंग का कारोबार करने वाले कई बड़े नामों के विरुद्ध गुरुवार को कार्रवाई की थी। वहां जांच-पड़ताल में पता चला कि कानपुर की फर्म कनोडिया कैपिटल एंड मैनेजमेंट प्रा. लि. से भी करोड़ों का लेनदेन हुआ है।
14 जून 1995 में रजिस्टर्ड हुई इस फर्म का रजिस्टर्ड पता 24-40, जैन विहार बिरहाना रोड है। यह पता महेश जैन के प्रतिष्ठान पीबी सोसाइटी ज्वैलर्स का है। यहां प्रथम तल से ट्रेडिंग और शेयर का कारोबार किया जाता है।
आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस फर्म में फ्लैट नंबर 504, पाम कोर्ट स्वरूपनगर निवासी अमित नेवटिया के अलावा 971 वाई ब्लॉक किदवई नगर निवासी ओम प्रकाश खंडेलवाल निदेशक हैं।
पूर्व में अमित के अलावा महेश जैन की बहू करुणा प्रशांत जैन भी निदेशक रही हैं, जिन्हें 7 जुलाई को हटाकर ओम प्रकाश खंडेलवाल को निदेशक बनाया गया है।
इस कंपनी के अलावा प्रताप टेलीकॉम मार्ट प्रा. लि, गोल्डन स्टॉक ब्रोकर्स और नॉवेले एडवाइजरी सर्विसेज प्रा. लि. में भी अमित नेवटिया निदेशक बताए जाते हैं।
बीते तीन सालों में कनोडिया कैपिटल ने अहमदाबाद के अलावा कोलकाता और कानपुर की ब्रोकरों से विभिन्न सौदों में 53 करोड़ रुपए का नुकसान होना दिखाया है। आयकर अधिकारियों के मुताबिक इस रकम को मुनाफा कमाने वाली फर्मों में समायोजित कर दिया गया।
आयकर कानून के मुताबिक यदि किसी कारोबारी को एक फर्म में लाभ होता है और दूसरी में नुकसान होता है तो इसका समायोजन होने के बाद जो राशि लाभ के रूप में शेष बचती है उस पर टैक्स देना होता है।
इस तरह 53 करोड़ रुपए की राशि पर बनने वाले लगभग 18 करोड़ की टैक्स चोरी की गई है। अधिकारियों ने इस बाबत तमाम दस्तावेज जब्त किए हैं। इनकी छानबीन करके अहमदाबाद की टीम को भेजने की तैयारी शुरू हो गई है।
टैक्स चोरी का नया जुगाड़
आयकर चोरी करने के लिए अपनाई जा रहीं नई-नई ट्रिक अधिकारियों को भी हैरान कर रही हैं। कुछ माह पूर्व आयकर विभाग के छापों में हीरे, सोयाबीन और अन्य उत्पादों की खरीद-बिक्री और आयात-निर्यात करके करोड़ों रुपए काले-सफेद करने का मामला सामने आया था।
इसके बाद कमोडिटी एक्सचेंज के इस नए इस्तेमाल के तरीके से सभी भौचक्के हैं। इस नए तरीके में पूर्वनियोजित कार्यक्रम बनाकर कुछ लोग ट्रेडिंग करते हैं। उदाहरण के लिए गेहूं, काजू, कपास या मकाई की ट्रेडिंग कमोडिटी एक्सचेंज में लगभग न के बराबर होती है।
एक व्यक्ति ने दस लाख रुपए के गेहूं का सौदा बुक किया। सौदा बुक करने के दस मिनट बाद इसे आठ लाख रुपए में बेचने के लिए डाल दिया गया। दूसरी तरफ एक डमी खरीदार ने तत्काल इस सौदे को आठ लाख रुपए में खरीद लिया।
इस तरह राम को लिखापढ़ी में पहले व्यक्ति को दो लाख रुपए का नुकसान हो गया। दूसरा व्यक्ति चूंकि एक डमी ग्राहक है, इसलिए हिसाब-किताब आसानी से हो गया।
कनोडिया कैपिटल में हुई जांच पड़ताल में पता चला है कि इसी तरह घाटे के तमाम सौदे कुछ मिनट या घंटे के अंतराल में किए गए हैं। आयकर विभाग की ताजा पड़ताल केे बाद शहर के अन्य कमोडिटी ब्रोकर्स पर भी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है।
अहमदाबाद में हुई छापेमारी के क्रम में यहां भी दो फर्मों की जांच-पड़ताल की गई थी। जांच पूरी कर ली गई है। शीघ्र ही इस मामले की पूरी जांच रिपोर्ट अहमदाबाद कार्यालय को भिजवा दी जाएगी।
ए.के.त्रिपाठी, निदेशक (आयकर जांच)