कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि की ओर से स्कोपस इंडेक्स्ड जर्नल में ही शोधपत्र प्रकाशित करने के नियम ने शोधार्थी छात्रों को परेशानी में डाल दिया है। स्कोपस में भाषा और परफॉर्मिंग आर्ट्स के बहुत कम जर्नल होने से शोधार्थी परेशान है। इससे उनके शोधपत्र प्रकाशित भी नहीं हो रहे हैं। इसको लेकर कानपुर विवि शिक्षक संघ (कूटा) के अध्यक्ष प्रो. बीडी पांडेय ने आपत्ति दर्ज कराते हुए अन्य जर्नल को भी शामिल करने की मांग की है।
छत्रपति शाहूजी महाराज विवि ने रिसर्च-पीएचडी की क्वालिटी को बढ़ाने के लिए उच्च स्तर के मानक तय कर दिए हैं। अब पीएचडी कर रहे सभी शोधार्थियों को अपने रिसर्च पेपर्स स्कोपस इंडेक्स्ड में ही पब्लिश कराने हैं। स्कोपस में भाषा के कम जर्नल होने की वजह से इसे पब्लिश करने में देरी हो रही है। एक से डेढ़ साल की वेटिंग चल रही है। स्कोपस में जर्नल पब्लिश होने से विवि को ग्लोबली पहचान मिलती है।
प्रो. बीडी पांडेय ने बताया कि जर्नल की संख्या कम और शोधार्थियों की संख्या अधिक होने से शोधपत्रों की लंबी वेटिंग सूची तैयार हो गई है। सर्वाधिक परेशान हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, संगीत, विधि के शोधार्थी हैं। उन्होंने कहा कि विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक को पत्र लिखकर स्कोपस के अलावा दुनिया के प्रतिष्ठित 10 अन्य जर्नल को भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें वेब ऑफ साइंस, एमएलए इंटरनेशनल बिबलियोग्राफी, गूगल स्कॉलर, डायरेक्ट्री ऑफ ओपन एक्सेस जर्नल्स, यूरोपियन रिफरेंस इंडेक्स फॉर द ह्युमिनिटीज एंड सोशल साइंसेज, इंडेक्स कोपरनिकस इंटरनेशनल, रिसर्च गेट, एकेडमिक एजु, ग्लोबल इंपैक्ट फैक्टर व जेएसटॉप-लिस्टेड जर्नल्स एंड प्रोजेक्ट एमयूएसई-इंडेक्स्ड पब्लिकेशन आदि हैं।