कानपुर देहात। जेल में बंद डकैत मंगली केवट ने बंदियों से जान का खतरा बताकर कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर स्पेशल गार्ड की निगरानी में पेशी पर लाने का अनुरोध किया था। इस पर पुलिस की ओर से दाखिल जवाब में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था में मंगली को कोर्ट लाने की बात कही गई थी।
वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने पुलिस के जवाब पर आपत्ति की है। अब कोर्ट ने एसपी व आईजी को पत्र लिख कर 2006 में तत्कालीन डीआईजी के निर्देश पर दी गई सुरक्षा हटाने के बाबत स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई 20 दिसंबर को होगी।
लूट, डकैती, अपहरण, हत्या के आरोपी डकैत मंगली केवट 19 जुलाई 2006 से लगातार जेल में निरुद्ध है। पहले वह कानपुर नगर की जेल में रहा। इस समय छह वर्षों से माती जेल में है। मंगली केवट पर दर्ज अवैध शस्त्र बरामदगी के मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय 14 वित्त आयोग निजेंद्र कुमार की अदालत में चल रही है।
मंगली ने पिछली तारीख में बंदियों से जान का खतरा बता स्पेशल गार्ड की निगरानी में कोर्ट में पेशी पर लाने की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर कोर्ट ने एसपी से रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस की रिपोर्ट में उसकी सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त होने की बात कही गई।
साथ ही अलग से स्पेशल गार्ड से भेजने की जरूरत न होने की रिपोर्ट भेजी गई थी। इस पर 10 दिसंबर को बचाव पक्ष के अधिवक्ता रघुनंदन निषाद ने आपत्ति दाखिल की थी। उन्होंने कहा कि 19 जुलाई 2006 में तत्कालीन डीआईजी के स्पेशल गार्ड संबंधी जारी निर्देश का एसपी की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट में जिक्र नहीं किया गया है।
अब कोर्ट ने तत्कालीन डीआईजी के निर्देश के संबंध में व स्पेशल गार्ड किसके आदेश पर हटाया गया है, इस बाबत स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए एसपी के साथ आईजी को भी पत्र लिखा गया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार पांडेय द्वितीय ने बताया कि अब मामले में सुुनवाई 20 दिसंबर को होगी।