हरदोई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने शहर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक को आठ पुलिस कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। धारा 156 (3) के तहत दिए गए एक प्रार्थना पत्र की सुनवाई के बाद सीजेएम ने ये आदेश पारित किया।
शहर कोतवाली क्षेत्र के सिविल लाइन्स निवासी अधिवक्ता राजकुमार सिंह यादव ने 14 अगस्त 2018 को कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वह कचहरी में वकालत करते हैं। 29 जून 2018 को शहर के एक गेस्ट हाउस से उनकी बेटी बबिता की शादी पुलिसकर्मी सुघर सिंह के बेटे प्रशांत के साथ होनी थी। राजकुमार सिंह के समधी सुघर सिंह व उपनिरीक्षक संजय कुमार शर्मा एक साथ सुरसा थाने में तैनात थे। उन दोनों के बीच पुरानी रंजिश चल रही थी। घटना के समय उपनिरीक्षक संजय कुमार शर्मा कोतवाली शहर में तैनात थे।
आरोप है कि 29 जून 2018 की रात करीब डेढ़ बजे जब गेस्ट हाउस में विवाह की रस्में चल रही थी तभी संजय शर्मा साथी उपनिरीक्षक मोहम्मद कय्यूम, शहर कोतवाली तत्कालीन वरिष्ठ उपनिरीक्षक घनश्याम शुक्ला, महिला थाने की तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक श्वेता, उप निरीक्षक राहुल कुमार सिंह व सिपाही अखिलेश मौर्या, आकिम खां व राजेश पांडेय के साथ रिवाल्वर, राइफल व डंडे लेकर गेस्ट हाउस में घुस आए। संजय कुमार शर्मा ने सुघर सिंह को गालियां दीं तो मना किया गया। इस पर पुलिस कर्मियों ने तलाशी लेने के बहाने महिलाओं के जेवर लूट लिए। विरोध करने पर परिजनों व रिश्तेदारों को काफी मारापीटा।
संजय शर्मा व मोहम्मद कय्यूम की ओर से दो झूठे मुकदमे भी दर्ज कराए गए। मामले में कोतवाली से आख्या मंगाने के बाद अदालत ने 2 दिसंबर 2019 को मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश पारित किया था। उक्त आदेश के विरुद्ध वादी राजकुमार सिंह यादव की ओर से रिवीजन प्रस्तुत किया था। जिस पर सत्र न्यायालय ने 2 दिसंबर 2019 के आदेश को अपास्त करते हुए उभयपक्ष को सुनकर पुन: विधिसम्मत आदेश पारित करने को निर्देशित किया गया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 5 मार्च को पुननिरीक्षण न्यायालय के आदेश के अनुक्रम में प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर मामले में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश पारित किया। अदालत ने आदेश दिया कि प्रार्थना पत्र में उल्लिखित तथ्यों के प्रकाश में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना करे एवं आदेश प्राप्ति की तिथि से एक सप्ताह के भीतर अनुपालन आख्या न्यायालय भेजे।