नर्सों का कहना है पूरे मामले में सच छिपाने की कोशिश हो रही है। डॉ. ज्योति सक्सेना से नर्सिंग स्टाफ ने हाथ जोड़कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। नर्सिंग स्टाफ ने इस पूरे मामले में खुद को बेकसूर बताया है।
कानपुर में मुर्दों के नाम रेमडेसिविर इंडेंट किए जाने के मामले में नर्सों ने हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति सक्सेना का घेराव किया। उनका कहना था कि इस प्रकरण में उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है। जांच कमेटी के रिपोर्ट देने के बाद सिस्टर इंचार्ज और एक फार्मासिस्ट के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई हुई थी और नौ स्टाफ को नोटिस दिया गया था।
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उनसे प्रकरण में स्पष्टीकरण मांगा गया था। सभी नर्स अपना स्पष्टीकरण लेकर पहुंची थीं। गुरुवार दोपहर को नर्सों ने प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का उनके कक्ष में घेराव किया था। उनका कहना था कि उन्हें चोर समझा जा रहा है। जिनके खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनके मोहल्ले के लोग हंसी उड़ा रहे हैं जबकि इस प्रकरण से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है।
जो दोषी हैं जांच करके कार्रवाई की जानी चाहिए। नर्सों के सिर पर ठीकरा न फोड़ा जाएगा। कुछ ने यह भी सवाल उठाया कि सिस्टर इंचार्ज को बिना स्पष्टीकरण मांगे ही निलंबित कर दिया गया। यह तरीका गलत है। नर्सें काम भी करें और टॉर्चर भी झेलें। एक स्टाफ ने बताया कि वे स्पष्टीकरण लेकर गईं थीं लेकिन लिया नहीं गया। बाद में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.सक्सेना के समझाने पर वे मान गईं।