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पीएचडी के 5000 डिग्री धारकों को राहत

Thu, 31 Mar 2016 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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रुड़की हरिद्वार रोड स्थित कुंती नमन कालेज में स्वच्छता अभियान को लेकर शपथ लेती छात्र-छात्राएं।
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कानपुर। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने वर्ष 2009 से पहले कानपुर यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले करीब पांच हजार डिग्री धारकों को राहत दी है। इन सभी को नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। अब ये यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति का आवेदन फार्म भी भर सकेंगे। अभी तक इस पर रोक थी। पीएचडी अध्यादेश में बदलाव का सर्कुलर 29 मार्च को राज्य और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजा गया है। इस छूट का फायदा यूपी के 15 हजार डिग्री धारकों को मिलेगा।
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छठवां वेतनमान लागू होने के बाद यूजीसी ने पीएचडी अध्यादेश 2010 में बदलाव करके 16 बिंदुओं का रिसर्च मानक बना दिया। इस पर खरा उतरने वाले डिग्री धारकों को ही नेट की अनिवार्यता से छूट मिलती है। इस मानक से 2009 या इससे पहले पीएचडी करने वाले डिग्री धारकों को दूर रखा गया था। इस कारण यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले पांच हजार डिग्री धारकों की डिग्री अमान्य हो गई। इससे परेशान अभ्यर्थियों ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और यूजीसी चेयरमैन से मुलाकात की। इस पर मंत्रालय ने एक कमेटी गठित की और इसकी रिपोर्ट भी आ गई है। रिपोर्ट का अध्ययन करके ही यूजीसी ने नेट की अनिवार्यता से छूट देने का फैसला किया। इसकी औपचारिक सूचना मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी जा चुकी है।
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