निर्णय के दिन लोक अदालत में नहीं पहुंचा
अशोक ने सजा के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी। मामला हाईकोर्ट गया तो अशोक ने जुर्माने की 40 प्रतिशत धनराशि लगभग 77,500 रुपये जिला जज के यहां नजारत में जमा करवा दिए थे, लेकिन राहत नहीं मिली। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया कि जमा धनराशि के अलावा 50 हजार रुपये प्रदीप को और मिलेंगे। अशोक ने समझौते के तहत रुपये अदा कर दिए और प्रदीप ने फाइल पर हस्ताक्षर भी बना दिए, लेकिन निर्णय के दिन जनवरी 2023 में लगी लोक अदालत में नहीं पहुंचा।
समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया
समझौता न होने पर अपील चलती रही। लगभग एक साल बाद नवंबर 2024 में प्रदीप ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि अशोक ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। उसे सिर्फ 20 हजार रुपये दिए गए और 30 हजार रुपये बाद में देने की बात कही थी। साथ ही उसके खिलाफ दाखिल आपराधिक मुकदमे को खत्म नहीं किया गया है।
कोर्ट ने अशोक की अपील स्वीकार कर ली
इस पर अशोक के अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने तर्क रखा कि समझौते में दूसरे किसी मुकदमे को खत्म करने की शर्त नहीं लिखी गई थी और पूरे 50 हजार रुपये भी प्रदीप ने पा लिए हैं। फाइल में रुपये प्राप्ति के संबंध में प्रदीप के हस्ताक्षर भी थे। प्रदीप ने खुद समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। प्रदीप के झूठे आरोपों को खारिज करते हुए कोर्ट ने अशोक की अपील स्वीकार कर ली और उसे दोषमुक्त करार दे दिया।