कानपुर देहात। जिले में सरांय पंजीकरण बिना पचास से अधिक होटल संचालित हैं। यहां लोग ठहरते हैं। इससे अवैध गतिविधि की गुंजाइश बनी रहती है।
जिले में बीते कुछ सालों में होटल कारोबार तेजी से बढ़ा है। कुछ होटल निजी तौर पर संचालित हैं तो कुछ सीमित कमरों के होटल एक नामी संस्था की फ्रेंचायजी लेकर संचालित किए जा रहे हैं। सरांय एक्ट में पंजीकरण जरूरी है। मगर किसी होटल का सरांय एक्ट पंजीकरण नहीं है। इस एक्ट के दायरे में गेस्ट हाउस, मैरिज सेंटर भी आते हैं।
यदि इन्हें भी शामिल कर लिया जाए तो संख्या तीन सैकड़ा के पार हो जाएगी। सरांय एक्ट में पंजीकरण के लिए संबंधित होटल संचालकों को स्वास्थ्य व अग्निशमन विभाग से भी अनापत्ति लेना होती है। एसडीएम सदर अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि जिले में पर्यटन अधिकारी तैनात नहीं है। यह पर्यटन अधिकारी की जिम्मेदारी है। तहसीलों से पंजीयन के लिए एडीएम प्रशासन ने निर्देश दिए हैं। जल्द ही इसपर अमल किया जाएगा।
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होटल आदि का सरांय एक्ट में पंजीकरण कराया जाए। इसके लिए तहसील स्तर पर निर्देश दिए गए हैं। होटल व गेस्टहाउस आदि को चिन्हित कर नोटिस दी जाएगी। संचालित होटल व गेस्ट हाउस आदि का पंजीकरण कराया जाएगा। - अमित कुमार, एडीएम प्रशासन
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राजस्व की लग रही चपत
होटल, गेस्ट हाउस में कमरे के किराया का करीब पांच फीसदी टैक्स पर्यटन विभाग को देने का नियम है। मगर सरांय एक्ट में होटल पंजीकृत नहीं है तो टैक्स पर्यटन विभाग को नहीं मिल पा रहा है। इससे साफ है कि होटल व गेस्ट हाउस संचालक कमाई कर रहे हैं। मगर सरकार को राजस्व की चपत लग रही है।