जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में रिजनरेटिव मेडिसिन का नया विभाग खुलेगा। इसमें शरीर की निष्क्रिय हो चुकीं कोशिकाओं (सेल) को सक्रिय करने का काम किया जाएगा। खराब हो चुकी कोशिका में स्टेम सेल का इंजेक्शन दिया जाएगा। इससे धीरे-धीरे नई कोशिका विकसित हो जाएगी और काम करने लगेगी। विभाग की जिम्मेदारी देश के जाने माने स्टेम सेल थेरेपिस्ट डॉ. बीएस राजपूत संभालेंगे। वे मेडिकल कॉलेज की विजिटिंग फैकल्टी हैं।
हर महीने के तीसरे मंगलवार को यहां आएंगे। ओपीडी के साथ रोगियों का उपचार भी करेंगे और डॉक्टरों को प्रशिक्षण देंगे। इस संबंध में मंगलवार को डॉ. बीएस राजपूत ने कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर संजय काला के साथ बैठक की। डॉक्टर को विजिटिंग फैकल्टी का सेवा विस्तार दिया गया है।
रिजनरेटिव मेडिसिन विभाग शुरू करने वाला जीएसवीएम प्रदेश का पहला मेडिकल कॉलेज है। विभाग की शुरुआत के लिए डॉ. बीएस राजपूत को तत्कालीन प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने दो साल पहले विजिटिंग फैकल्टी बनाया था।
हालांकि कोरोना काल आ जाने के कारण योजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। इस बीच डॉ. राजपूत की विजिटिंग फैकल्टी की अवधि समाप्त हो गई। डॉ. काला नए सिरे से उन्हें विजिटिंग फैकल्टी बना दिया है। डॉ. राजपूत जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पुरातन छात्र हैं।
डॉ. राजपूत अब तक बोन मैरो ट्रांसप्लांट के तीन हजार केस कर चुके हैं। डॉ. काला ने बताया कि स्टेम सेल थेरेपी में महंगे सामान इस्तेमाल होते हैं लेकिन रोगियों का मुफ्त इलाज होगा। अगर गरीब रोगी सामान नहीं खरीद पाएंगे तो खरीदकर देंगे। उन्होंने बताया कि 21 सितंबर को डॉ. राजपूत स्टेम सेल थेरेपी पर व्याख्यान देंगे। इसके साथ ही केस भी करेंगे। रिजनरेटिव मेडिसिन में चार विभागों का समन्वय होगा जिसमें आर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और बालरोग हैं।
स्टेम सेल थेरेपी से इन रोगियों को होगा फायदा
- जिनकी स्पाइनल कार्ड डैमेज हो गई हो
- सिर पर चोट के रोगी, न्यूरो के रोगी
- पोस्ट कोविड सिंड्रोम में फेफड़ों की फाइब्रोसिस हो
- मसल डिस्ट्रॉफी के रोगी
- शारीरिक और मानसिक विकास रुकने के रोगी
- आटिज्म के रोगी
- डायबिटीज के रोगी