कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि और संबद्ध डिग्री कॉलेजों में नियुक्ति परीक्षक अगर छात्रों को 80 फीसदी अंक देते हैं तो उनको टिप्पणी कर इसका कारण बताना होगा। परीक्षकों की ओर से दिए गए अंकों की हस्ताक्षरित कॉपी को स्कैन कर अपलोड करने के बाद परीक्षा फल जारी किया जाएगा।
यह फैसला बुधवार को परीक्षा समिति की बैठक में हुआ। वहीं, प्रायोगिक परीक्षा में अधिक अंक देने में डिबार हुए 600 शिक्षकों व 60 कॉलेजों की भी बहाल करने की तैयारी की जा रही है।
विवि में पिछले सेमेस्टर में हुई स्नातक और परास्नातक की प्रायोगिक परीक्षाओं में कई ऐसे कॉलेज चिह्नित हुए जिनके सौकड़ों विद्यार्थियों को 75 में से 73, 74 और 75 अंक दे दिए गए थे। जांच के बाद विवि की ओर से गठित कमेटी ने 600 शिक्षकों और 60 कॉलेजों को एक साल के लिए डिबार किया था।
वहीं मामले में कानपुर विवि स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ ने शिक्षकों को बहाल करने की मांग विवि से की थी। कुलपति की अध्यक्षता में हुई परीक्षा समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि डिबार शिक्षक सीडीसी प्रो. आरके द्विवेदी के सामने क्षमा याचना स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित हो।
साथ ही वह अपना आधार, पैन कार्ड और नियुक्ति पत्र लेकर आएं, तब शिक्षकों की बहाली पर विचार होगा। भविष्य में गलती दोहराने में तीन साल के लिए डिबार किया जाएगा।
वहीं, महाविद्यालयों को भी शपथ पत्र देना होगा। अगर कॉलेज यह गलती दोहराते हैं तो उसे यूएफएम की श्रेणी में डाला जाएगा। इन महाविद्यालयों में परीक्षा विवि की ओर से नामित पर्यवेक्षकों की उपस्थिति और सीसीटीवी कंट्रोल रूम की निगरानी में संपन्न कराई जाएगी। वहीं, कानपुर विवि स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. कमलेश द्विवेदी और महामंत्री डॉ. अखंड प्रताप सिंह ने इसके लिए विवि को धन्यवाद ज्ञापित किया है।