अगर आप सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई में फंस चुके हैं तो अब बैंक अफसर इसे आपके लोन खाते में चेतावनी संकेत के रूप में दर्ज कर लेंगे। यह संकेत इस ओर इशारा करेगा कि लोन खाता गड़बड़ा सकता है। ऐसे 45 बिंदुओं को लेकर आरबीआई ने हाल ही में धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिए विशेष खाका तैयार किया है।
इसमें लोन देने के पूर्व की प्रक्रिया को भी सख्त किया गया है। पहली बार लोन आवेदक की सामाजिक छवि भी उसे लोन दिलाने में बड़ा रोल निभाएगी। बिजनेस के अलावा हाउसिंग, एजूकेशन, कार आदि के लोन में बड़े पैमाने पर डिफॉल्ट हो रहे हैं।
इससे बैंकों का एनपीए बेतहाशा बढ़ा है। इस मुद्दे पर रिजर्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंथन करके इससे निपटने के लिए एक कार्ययोजना तैयार की है।
7 मई को आरबीआई के चीफ जनरल मैनेजर की ओर से जारी 15 पेज की इस कार्ययोजना में 45 महत्वपूर्ण बिंदु दिए गए हैं, जिन्हें अर्ली वॉर्निंग सिग्नल्स (शुरुआती चेतावनी संकेत) का दर्जा दिया गया है। इन संकेतों से यह माना जाएगा कि संबंधित लोन खाता फ्रॉड या एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट्स) की ओर बढ़ रहा है।
इसमें आयकर, वाणिज्य कर और उत्पाद शुल्क विभाग के छापों को भी शामिल किया गया है। यानी कि अगर लोन आवेदक के यहां इन विभागों की कार्रवाई हो चुकी है तो मामला संदिग्ध माना जाएगा।
इसके अलावा व्यापार स्थल का बीमा असल मूल्य से कम या अधिक होने पर, लोन में लगाई गई सिक्योरिटी का टाइटल विवाद मिलने पर, लोन में दर्शाए गए प्रोजेक्ट के स्कोप को बार-बार बदलने पर, टैन या अन्य पंजीकरण नंबरों के बगैर इनवॉइस जारी करने पर, बिना किसी वाजिब कारण के चलते बैंक की ओर से गोदाम के निरीक्षण की तिथि बदलने की गुजारिश करने आदि को भी शामिल किया गया है।
इसके अतिरिक्त संबंधित बैंक शाखा से बहुत दूर की यूनिट को फाइनेंस करने को भी नए दिशानिर्देशों में उचित नहीं बताया गया है।
आरबीआई के ताजा दिशानिर्देश धोखाधड़ी के मामलों को रोकने में बेहद अहम साबित होंगे। मगर यह आवश्यक है कि आरबीआई की ओर से इन निर्देशों का समय से पालन हो। बैंक अपने स्टाफ को फ्रॉड कंट्रोल करने संबंधी प्रशिक्षण दिलाएं तो बेहतर है।
- एडवोकेट हेमंत गुप्ता, बैंकिंग सलाहकार